प्रदेश सरकार ने सरकारी मुदकमों की पैरवी में लापरवाही को गंभीरता से लिया है। अब यदि किसी मुकदमे में कोई अपील या रिट याचिका देर से दाखिल किए जाने की वजह से न्यायालय से खारिज होगी तो इसके लिए प्रशासकीय विभाग की जिम्मेदारी तय की जाएगी। विभाग के संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों द्वारा हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जाने वाली सेवा संबंधी याचिकाओं में शासन स्तर से की जाने वाली पैरवी की समीक्षा कराई। पता चला कि ऐसे मामलों में उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय द्वारा पािरत निर्णय व आदेशों का समय से पालन नहीं किया जाता है, जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है। इसके अलावा न्यायालयों के समक्ष असमंजस की स्थिति उत्पन्न होती है जिससे विपरीत आदेश पारित होने की प्रबल संभावना रहती है।
प्रमुख सचिव न्याय एवं विधि परामर्शी जेपी सिंह-द्वितीय ने हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल रिट याचिकाओं व अपील दाखिल किए जाने के संबंध में कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने शासन के सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों व सचिवों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।
ये हैं प्रमुख निर्देश
प्रशासकीय विभाग सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट या अन्य न्यायालयों में देर से रिट याचिका/अपील दाखिल न किया जाना सुनिश्चित करें।
यदि किसी कारण से रिट याचिका/ अपील दाखिल किए जाने में देरी है तो दिन-प्रतिदिन की देरी का अनिवार्य रूप से स्पष्टीकरण दिया जाए।
देरी से रिट याचिका या अपील दाखिल होने पर खारिज/निरस्त होने की दशा में प्रशासकीय विभाग उत्तरदायी होगा।
समस्त प्रशासकीय विभाग पर्यवेक्षण व उत्तरदायित्व निर्धारण की इस तरह की व्यवस्था बनाएं जिससे रिट याचिका/अपील दाखिल किए जाने से संबंधित लंबित मामलों की मॉनिटरिंग हो सके। पारित निर्णयों का समय से अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।