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UP: बिजली निजीकरण में अब कानूनी दांवपेंच, उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में दाखिल किया विधिक प्रस्ताव

Mon, 18 Aug 2025 09:55 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि बिजली कंपनियों पर निकल रहे 33122 करोड़ सरप्लस का मामला भी विचाराधीन है। ऐसे में विद्युत नियामक आयोग को कानून की परिधि में निर्णय लेते हुए 42 जिलों के निजीकरण के प्रस्ताव को खारिज कर देना चाहिए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बिजली के निजीकरण में अब कानूनी दांवपेंच शुरू हो गया है। नियामक आयोग में उपभोक्ता परिषद ने विधिक प्रस्ताव दाखिल कर मांग की है कि अदालत में लंबित प्रकरणों के निस्तारण से पहले निजीकरण की अनुमति न दी जाए। उधर, नियामक आयोग की ओर से निजीकरण के प्रस्ताव में निकाली गई कमियों को दूर करके ऊर्जा विभाग को सोमवार को दोबारा प्रस्ताव सौंपना था, लेकिन कोई अधिकारी नहीं पहुंचा।

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राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सोमवार को नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार व सदस्य संजय सिंह से मिलकर उन्हें विधिक प्रस्ताव सौंपा। इसमें वर्मा ने कहा है कि अपीलीय ट्रिब्यूनल में विचाराधीन मुकदमों पर होने वाले निर्णय पूर्वांचल और दक्षिणांचल निगमों की संपत्ति को प्रभावित करेंगे। इसलिए ट्रिब्यूनल के निर्णय महत्वपूर्ण है। सभी बिजली कंपनियों की ओर से विद्युत नियामक आयोग द्वारा घोषित बिजली दर वर्ष 2018-19 से लेकर वर्ष 2024-25 तक यानी आयोग के पांच आदेश को भी चुनौती दी गई है। इसमें संपत्ति और हिस्सेदारी से जुड़े मामले भी हैं।

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उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर निकल रहे 33122 करोड़ सरप्लस का मामला भी विचाराधीन है। ऐसे में विद्युत नियामक आयोग को कानून की परिधि में निर्णय लेते हुए 42 जिलों के निजीकरण के प्रस्ताव को खारिज कर देना चाहिए। जब अपीलीय ट्रिब्यूनल का निर्णय आ जाए तभी निजीकरण पर फैसला दिया जाए, क्योंकि निर्णय आने पर कंपनियों की बैलेंसशीट बदल जाएगी। इसी तरह नोएडा पॉवर कंपनी ने पहले से ही वर्ष 2019-20 से 2024 25 तक बिजली दर तय करने के लिए लागू मल्टी ईयर टैरिफ कानून को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस पर सुनवाई चल रही है। इसमें विद्युत नियामक आयोग भी प्रतिवादी है।

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यूपी पर न थोपा जाए ओडिशा और चंडीगढ़ के विफल मॉडल : समिति

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने सीएम योगी आदित्यनाथ से ओडिशा और चंडीगढ़ का विफल मॉडल यूपी पर में न लागू करने की मांग की है। पदाधिकारियों ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे सुधार को देखते हुए निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल रद्द किया जाए। सीएम को भेजे पत्र में पदाधिकारियों ने कहा कि पूर्वांचल व दक्षिणांचल निगमों के निजीकरण के लिए ट्रांजेक्शन एडवाइजर के चयन में चंडीगढ़ मॉडल को अपनाया गया है।

चंडीगढ़ में 24 घंटे आपूर्ति का दावा था, लेकिन कटौती से वहां विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। छह माह में ही हालात इतने खराब हो गए हैं कि मुख्य सचिव को अपने हाथ में कमान लेनी पड़ी है। ऐसे में यह मॉडल यूपी में लागू न होने दिया जाए। वहीं, समिति की ओर से निजीकरण के विरोध में सभी जिलों एवं परियोजना मुख्यालयों पर प्रदर्शन जारी रहा। 
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