खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग में आगरा एवं गोरखपुर में भी अत्याधुनिक लैब तैयार हो गई है। यहां खाद्य पदार्थों में मौजूद रासायनिक एवं एंटीबायोटिक्स की भी जांच हो सकेगी। अभी तक यह सुविधा लखनऊ, वाराणसी और मेरठ में उपब्ध है।
प्रदेश में खाद्य पदार्थों में कई तरह की मिलावट होने की शिकायत मिलती रहती है। इसकी सही पहचान के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीेए) विभाग खाद्य प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैश कर रहा है। इसके तहत पहले लखनऊ, वाराणसी एवं मेरठ में लैब में हाई एंड एक्यूपमेंट लगाए गए थे। अब यह सुविधा आगरा एवं गोरखपुर की लैब में भी हो गई है। लैब में अत्याधुनिक उपकरण लगने से खाद्य पदार्थों में होने वाली हर स्तर की मिलावट की जांच हो सकेगी।
खाद्य पदार्थ में पेस्टीसाइट्स, रेसीड्यूज, हैवी मेटल्स, एंटीबायोटिक्स आदि की भी जांच हो सकेगी। इसी तरह आर्गेनिक खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता भी परखा जा सकेगा। उप आयुक्त हरिशंकर सिंह ने बताया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए लगातार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। गोरखपुर, वाराणसी, झांसी, बरेली, मुरादाबाद, देवीपाटन एवं सहारनपुर मंडल में नई सचल खाद्य प्रयोगशाला भी चलाई जा रही है। सचल प्रयोगशाला विभिन्न स्थानों पर जाकर सैंपल इकट्ठा कर रही है।
40 हजार से ज्यादा दिए लाइसेंस
एफएसडीए के उप आयुक्त हरिशंकर सिंह ने बताया कि छह माह केअंदर करीब 40 हजार लोगों को खाद्य पदार्थ बिक्री से संबंधित लाइसेंस दिए गए हैं। पहले करीब 68 हजार लोगों के पास लाइसेंस थे। ऐसे अभियान चलाकर खाद्य पदार्थ बेचने वालों को लाइसेंस जारी किया गया। अब एक लाख से अधिक लाइसेंसधारी खाद्य पदार्थ विक्रेता हैं। टीमें विभिन्न बाजारों में जाकर सचेत कर रही हैं कि बिना लाइसेंस के खाद्य पदार्थ बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह खाद्य पदार्थों की नियमित जांच भी जा रही है।