प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नई रणनीति बनाई गई है। अब चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए प्रदेश स्तर पर संयुक्त मेरिट सूची बनेगी। छात्र-छात्राओं को काउंसिलिंग में हिस्सा लेना होगा। मेरिट के आधार पर कॉलेज और डिप्लोमा कोर्स अलॉट होंगे। यह व्यवस्था अगले सत्र से लागू करने की जाएगी। इससे कॉलेजों की मनमानी पर रोक लगेगी। मेधावी छात्रों को विभिन्न कोर्स में आसानी से प्रवेश मिल सकेगा।
प्रदेश के विभिन्न कॉलेजों में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े करीब 35 डिप्लोमा कोर्स चल रहे हैं। इसमें हर साल करीब 20 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं प्रवेश लेते हैं। हर कॉलेज अपने हिसाब से आवेदन मांगते हैं। इंटरमीडिएट में मिले नंबर के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाती है। इसी सूची से प्रवेश दिया जाता है। निजी कॉलेजों पर कोर्स के नाम पर मनमानी के आरोप लगते रहे हैं। इस मनमानी को खत्म करने के लिए नई रणनीति बनाई गई है। अब पूरे प्रदेश के कॉलेजों के लिए नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कोर्स की संयुक्त प्रवेश सूची बनाई जाएगी।
इस सूची में छात्रों को कॉलेजों के नाम और कोर्स वरीयता क्रम में भरना होगा। अधिक नंबर पाने वाले छात्रों को वरीयता के आधार पर कोर्स और सरकारी कॉलेज अलॉट होंगे। काउंसिलिंग का पूरा पैटर्न नीट की तरह ही किया जाएगा। पहली, दूसरी और तीसरी काउंसिलिंग में कोर्स और कॉलेज का वरीयता क्रम घटता रहेगा। उत्तर प्रदेश स्टेट मेडिकल फैकल्टी नए पैटर्न पर प्रवेश देने के लिए कार्य योजना बनाने में जुटी है। अगले सत्र में इसे लागू करने की तैयारी है। फैकल्टी के सचिव डा. आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि नई व्यवस्था से अस्पतालों को उत्कृष्ट क्षमता वाले मैन पॉवर मिल सकेंगे। प्रतिभावान छात्रों को बेहतर मौका मिलेगा।
क्या होगा फायदा
अभी तक तमाम कॉलेज अपने सगे संबंधियों को मनचाहा डिप्लोमा कोर्स करा देते हैं। आरोप यह भी लगता है कि तमाम कॉलेज डिप्लोमा कोर्स के नाम पर मुंहमांगी कीमत वसूलते हैं, जिसे चाहते हैं उसे प्रवेश देते हैं। प्रदेश स्तर पर नई व्यवस्था लागू होने से यह मनमानी खत्म हो जाएगी। अधिक नंबर पाने वाले छात्रों को उनके मन मुताबिक कोर्स में प्रवेश मिल सकेगा। इससे चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी। भविष्य में अस्पतालों को दक्ष कर्मचारी मिलेंगे तो इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
इन कोर्स के लिए होगी नई व्यवस्था
डिप्लोमा इन जनरल नर्सिंग, डिप्लोमा इन बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी, डिप्लोमा इन एनेस्थिसिया एंड क्रिटिकल केयर, डिप्लोमा इन सीएसडीसी, डिप्लोमा इन सिटी स्कैन, डिप्लोमा इन कार्डियो टेक्नीशियन, डिप्लोमा इन लैब टेक्नीशियन, डिप्लोमा इन एमआरआई, डिप्लोमा इन फिजियोथेरेपी, डिप्लोमा इन एक्यूपंचर, डिप्लोमा इन आडियो एंड स्पीच थेरेपी, डिप्लोमा इन डायलिसिस टेक्नीशियन सहित चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े अन्य सभी डिप्लोमा कोर्स।
चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नर्सिंग एवं पैरा मेडिकल के डिग्री कोर्स की प्रवेश परीक्षा अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय करा रहा है। डिप्लोमा कोर्स के लिए नई कार्ययोजना तैयार की जा रही है। अगले सत्र से प्रदेश स्तर पर मेरिट सूची बनाकर विभिन्न कॉलेजों में प्रवेश दिया जाएगा। यह प्रदेश के लिए नया मॉडल होगा।
- आलोक कुमार, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा