यूपी के वन विभाग ने केंद्र को निजी पालकों के पास अवैध रूप से रखे गए हाथियों के पंजीकरण करने का प्रस्ताव भेजा है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने यह सुविधा वर्ष 2003 में दी थी, पर तब जानकारी के अभाव में तमाम निजी हाथी पालक इनका पंजीकरण नहीं करा पाए थे। वर्तमान में इन हाथियों को रखना अवैध माना जाता है और मामला प्रकाश में आने पर वन विभाग को उन्हें जब्त करने का अधिकार है।
इस संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक सुनील चौधरी ने केंद्रीय मंत्रालय के अधीन प्रोजेक्ट एलीफेंट के अपर वन महानिदेशक को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि अन्य राज्यों से यूपी में हाथी लाए जाते हैं और इन्हें स्थायी तौर पर रखा जाता है। इनको पालने के लिए उन व्यक्तियों के पास विधिवत स्वामित्व प्रमाणपत्र नहीं होता है। ऐसे लोग वन विभाग को विधिवत सूचना भी नहीं देते हैं। इससे विधिक कार्रवाई करने में भी मुश्किल आती है।
प्रदेश में ऐसे हाथियों का रजिस्ट्रेशन न होने के कारण कभी-कभी कानून-व्यवस्था की समस्या भी पैदा हो जाती है। वर्ष 2003 में जब हाथियों का पंजीकरण प्रारंभ हुआ था, तब कई हाथी स्वामियों ने अपने हाथियों का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। जबकि, वन्यजीव (संरक्षण) 1972 में निहित प्रावधानों के अनुसार ऐसे हाथी स्वामियों के पास हाथियों का लाइसेंस होना आवश्यक है। वन्यजीव के सफल प्रबंधन के लिहाज से वर्ष 2003 की तरह पंजीकरण व्यवस्था किया जाना आवश्यक है।
मुख्य वन जीव प्रतिपालक ने अनुरोध किया है कि ऐसे अपंजीकृत हाथियों के पंजीकरण के लिए वन्यजीव (संरक्षण) 1972 की धारा 40 ए में दिए गए प्रावधानों के अनुसार समय दिया जाए। माना जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रालय से शीघ्र ही इसकी अनुमति मिल सकती है।