मामले की गंभीरता का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि अपर मुख्य सचिव, वन मनोज कुमार सिंह ने रविवार को अवकाश के बावजूद विभागाध्यक्ष के स्तर से विगत 15 दिनों में रेंजरों के किए गए सभी स्थानांतरण तत्काल प्रभाव निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया।
वन विभागाध्यक्ष ममता संजीव दुबे ने सेवानिवृत्ति से तीन दिन पहले 90 से ज्यादा क्षेत्रीय वनाधिकारियों (रेंजरों) के तबादले कर दिए। इसमें विभागीय मंत्री को भी भरोसे में नहीं लिया गया। मंत्री की नाराजगी के बाद शासन ने सभी तबादले निरस्त कर दिए हैं। शासन ने विभागाध्यक्ष के रवैये को स्वेच्छाचारी और विभागीय हितों के प्रतिकूल बताते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।
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वन विभाग में 28 जुलाई को 70-100 रेंजरों के तबादले कर दिए गए, जबकि 35 करोड़ पौधरोपण अभियान के चलते स्थानांतरण के लिए कट ऑफ डेट 30 जून को बढ़ाकर यहां 30 सितंबर कर दी गई थी। ये तबादले विभागाध्यक्ष ममता संजीव दुबे के स्तर से किए गए। वह 31 जुलाई को रिटायर हो जाएंगी। वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने पहले यह मामला सरकार में उच्चस्तर पर उठाया।
उच्चस्तर से हरी झंडी मिलने पर वन मंत्री ने अपर मुख्य सचिव, वन एवं पर्यावरण को पत्र लिखा कि क्षेत्रीय वनाधिकारियों का स्थानांतरण आदेश बिना मेरी अनुमति, अनुमोदन और विचार-विमर्श किए जारी किए गए हैं। जबकि, 15 अगस्त को 5 करोड़ पौधरोपण किया जाना शेष है। इतना ही नहीं वन मंत्री ने तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण आदेशों को निरस्त करते हुए प्रकरण की सक्षम स्तर से जांच कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दे दिए हैं।
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संदेह के घेरे में सभी तबादले
मामले की गंभीरता का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि अपर मुख्य सचिव, वन मनोज कुमार सिंह ने रविवार को अवकाश के बावजूद विभागाध्यक्ष के स्तर से विगत 15 दिनों में रेंजरों के किए गए सभी स्थानांतरण तत्काल प्रभाव निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश में यह भी कहा गया है कि इन तबादलों पर न ही शासन का पूर्व अनुमोदन लिया गया और न ही तबादलों की प्रतिलिपि मुहैया कराई गई। इस तरह वृक्षारोपण सत्र के मध्य में किए गए क्षेत्रीय अधिकारियों के स्थानांतरण संदेह के घेरे में आ जाते हैं।