शहरी क्षेत्रों में सड़कों को गड्ढामुक्त करने के मामले में अब खानापूरी का खेल नहीं चलेगा। नगर विकास विभाग ने सभी नगर निकायों को इस मुद्दे पर हलफनामा के साथ गडढामुक्त की गई सड़कों की सूची उपलब्ध कराने को कहा है। हलफनामा में यह साफ लिखना होगा कि निकाय के स्वामित्व वाली एक भी सड़क में गड्ढ़ा नहीं है। इसके लिए 22 नवंबर तक की समय सीमा दी गई है।
सभी शहरी निकायों के अधिशासी अधिकारियों और नगर आयुक्तों को गड्ढामुक्ति का हलफनामा देना होगा। उन्हें बाकायदा शपथ पत्र जमा करना होगा कि उनके यहां अब एक भी सड़क में गड्ढे नहीं हैं। जितनी भी सड़कें उनके यहां गड्ढामुक्ति के लिए चिह्नित की गई थीं। सबके गड्ढे भरे जा चुके हैं। नगरीय निकाय निदेशालय ने सभी शहरी निकायों को 22 नवंबर तक शपथपत्र भेजने के आदेश दिए हैं।
बारिश में जलभराव की वजह से शहरी इलाकों की सड़कों की स्थिति काफी खराब हो गई थी। इसको दुरुस्त करवाने के लिए 15 नवंबर तक की मियाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तय की थी। तय मियाद में सड़कों के गड्ढे भरे जाने थे और जहां पर नए सिरे से सड़कें बनानी थींए वहां उन्हें बनाया जाना था। कहां पर कितनी सड़कें बनीं या कहां बनने से रह गई हैं उनकी जिम्मेदारी अब शहरी निकायों के प्रशासनिक मुखिया को खुद लेनी होगी। उन्हें हलफनामा देना होगा कि अब उनके यहां सड़कों की गड्ढामुक्ति का काम पूरा हो गया है।
अगर कहीं से आई शिकायत तो निकाय खुद होंगे जिम्मेदार
इस हलफनामे के बाद अगर कहीं से खराब सड़कों की शिकायत आती है तो इसके लिए शहरी निकाय खुद जिम्मेदार होंगे। यही वजह है कि निकायों से हलफनामा लिया जा रहा है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि यह कोशिश बीते साल भी हुई थी। कई शहरी निकायों ने हलफनामा दायर किया था जबकि काफी बचे रह गए थे। कई बार बचे हुए शहरी निकायों के अधिकारियों को नोटिस भी जारी हुएए लेकिन उन्होंने तबपर भी हलफनामा जमा नहीं किया था।