गैस कंपनियों ने हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलिंडर बुकिंग में डीएसी (डिजिटल ऑथेंटिकेशन कोड) कोटा बढ़ाकर 100 फीसदी कर दिया है। अब बुकिंग के बाद डीएसी नंबर मिलने पर ही उपभोक्ताओं को सिलिंडर मिल सकेंगे। इससे बिना कनेक्शन ही मान मनुहार व जुगाड़ से सिलिंडर हासिल कर लेने वालों के सामने बड़ी चुनौती आ गई है। हालांकि, इससे कालाबाजारी पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।
गैस की किल्लत के बीच घरेलू से लेकर व्यावसायिक कनेक्शन नहीं हो रहे हैं। इससे उन लोगों के सामने बड़ी समस्या आ गई है जो इधर उधर से सिलिंडर लेकर काम चला रहे थे। सरकार ने भी किल्लत के बीच डिजिटली बुकिंग कोटा को धीरे धीरे बढ़ाते हुए 100 प्रतिशत तक कर दिया। इससे सिर्फ उन लोगों को ही सिलिंडर मिल पा रहे हैं जिनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर डीएसी नंबर जा रहा है।
अगर डीएसी नंबर नहीं है तो बुकिंग के बावजूद सिलिंडर की डिलीवरी नहीं हो रही है। इन तमाम नियमों से वह लोग समस्याग्रस्त हैं जो बिना कनेक्शन के थे, या फिर जिनकी बुकिंग हिस्ट्री अनियमित है। ऐसे लोग जो एक शहर से दूसरे शहर गए तो कनेक्शन ट्रांसफर नहीं कराया। वहीं, व्यावसायिक क्षेत्र में आधे से ज्यादा दुकानदारों के पास जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं है, जिससे उनका व्यावसायिक कनेक्शन नहीं हो पाया। फौरी तौर पर राहत के लिए शुरू किए गए छोटू सिलिंडर मिलने में भी दिक्कत है।
अब सबको छोटू सिलिंडर भी नसीब नहीं
शुरूआत में सबके लिए शुरू किए गए 5 किलो वाले छोटू सिलिंडर भी सबको नसीब नहीं हो रहे हैं। बढ़ती सख्ती की वजह से सिर्फ प्रवासी मजदूर और छात्रों को ही दिए जा रहे हैं। छोटे व्यवसायी, अन्य दुकानदार व घरेलू इस्तेमाल के लिए नए कनेक्शन लेने वालों को भी झटका लगा है। यह सब अंगीठी, भट्ठियों और इंडक्शन के भरोसे ही हैं।
छोटे से बड़े सब सिलिंडरों में डीएसी
ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश राज बताते हैं कि सरकार के नए आदेश के तहत सिर्फ प्रवासी मजदूरों व छात्रों को ही 5 किलो का सिलिंडर दिया जा रहा है। एक महीने में सिर्फ दो सिलिंडर मिलेंगे। छोटा हो या बड़ा, घरेलू इस्तेमाल के सब सिलिंडरों की बुकिंग पर डीएसी अनिवार्य कर दी गई है।