मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद पुनर्गठित कैबिनेट की पहली बैठक 9 नवंबर को होगी। इसमें कुछ महत्वपूर्ण फैसले किए जा सकते हैं क्योंकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बदले मंत्रियों के साथ सरकार को लेकर कुछ नया संदेश भी जरूर देना चाहेंगे। फिलहाल बैठक का एजेंडा तय नहीं हो पाया है।
सूत्रों के अनुसार, स्टॉक लिमिट के तहत दाल की विभिन्न स्तर पर भंडारण सीमा तय करने के साथ इसे आवश्यक वस्तु अधिनियम कानून में शामिल करने का फैसला कैबिनेट में हो सकता है।
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने भी पिछले दिनों यहां दाल की जमाखोरी रोकने के लिए कैबिनेट की बैठक में प्रस्ताव लाकर कानून को कड़ा करने की बात कही थी।
दो दशक बाद कोई सिख होगा कैबिनेट का हिस्सा
लगभग दो दशक बाद बलवंत सिंह रामूवालिया के रूप में कोई सिख प्रदेश कैबिनेट की बैठक का हिस्सा रहेगा। इसके पहले भाजपा सरकार में डॉ. सरजीत सिंह डंग ही प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल थे। साहब सिंह सैनी तो पहली बार ही किसी कैबिनेट की बैठक का हिस्सा होंगे। सैनी पहली बार मंत्री ही बने हैं और वह भी कैबिनेट।
अरविंद सिंह गोप स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री ग्राम्य विकास के रूप में पहले विभागीय प्रस्ताव के विचारार्थ बैठक में जरूर शामिल हुए होंगे। पर, अब वह कैबिनेट की हर बैठक का हिस्सा रहेंगे। कमाल अख्तर और विनोद सिंह पंडित सिंह भी पहली बार इसमें शामिल होंगे। दोनों अभी तक राज्यमंत्री थे। इस कारण, कैबिनेट की बैठक का हिस्सा नहीं थे।
कुछ बदली भूमिका में तो कुछ नहीं होंगे : अहमद हसन, राम गोविंद, बलराम यादव, दुर्गा यादव, ब्रह्माशंकर त्रिपाठी, रघुराज प्रताप सिंह राजा भैया, अवधेश प्रसाद, इकबाल महमूद, महबूब अली कैबिनेट बैठक में बदले विभागों के मंत्री के रूप में होंगे। तो अंबिका चौधरी, नारद राय, राजा अरिदमन सिंह, शिवकुमार बेरिया और शिवाकांत ओझा बैठक में नहीं दिखेंगे।