फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'अलिखेश सरकार को बनना होगा सेल्समैन'

Sun, 01 Dec 2013 08:34 AM IST
महेंद्र तिवारी/लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
निवेश के लिए निजी कंपनियां केवल ‘रेड-कार्पेट वेलकम’ नहीं चाहतीं। वास्तव में वे हजारों करोड़ के निवेश के पहले पूरी गहराई से यह समझना चाहती हैं कि सूबे का राजनीतिक नेतृत्व उसे लेकर कितना गंभीर है?
विज्ञापन


वजह, उसके प्रोजेक्ट को मंजूरी से लेकर, बिजली, सिक्योरिटी और लॉ एंड आर्डर तो उसी के दम पर मिलना है।

अफसर तो अच्छी बात कहकर चले जाते हैं, लेकिन जब फाइलें अटकती हैं तो फिर बगले झांकने लगते हैं। अंतिम तौर पर निवेशक को फिर उसी के दरबार में मत्था टेकना होता है।

ऐसे में जिसके नाम पर देश भर से लोगों को बुलाया गया यदि उसने ही महत्व नहीं दिया तो फिर निवेशक कितना महत्व देंगे, यह सोचने वाली बात होगी?

पता चलता है, कितना इंट्रेस्ट है
‘ई-यूपी’ में आए एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के एमडी कहते हैं, 'हर राज्य को अपने प्रदेश में निवेश लुभाने के लिए साल में कुछ चुनिंदा मौके मिलते हैं। इसे लेकर उनका कितना इंट्रेस्ट है, उद्यमी इसमें भागीदारी से अंदाज लगा लेते हैं। प्रतिष्ठित उद्योग संगठनों के आयोजनों पर हर राज्य की नजर होती है।'
विज्ञापन


सीआईआई की रीजनल एजीएम व इन्वेस्ट नार्थ जैसे कार्यक्रम का यूपी, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, जम्मू कश्मीर व पंजाब जैसे राज्यों के लिए बड़ा महत्व होता है।

पर, अखिलेश ने बनाई दूरी
दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, हरियाणा के भूपेंद्र हुड्डा, जम्मू कश्मीर के उमर अब्दुल्ला व पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखवीर सिंह बादल अक्सर ऐसे कार्यक्रमों में आते हैं लेकिन यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इससे दूर ही रहे।

सीएम ने दूसरी बार किया ऐसा
मुख्यमंत्री को एक अच्छा मौका यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) की अमेरिका में हो रही एजीएम में शामिल होने का मिला था। काउंसिल के लोगों ने लखनऊ आकर एक बड़ा माहौल बनाया था। मगर मुख्यमंत्री वहां भी नहीं गए। इसके बाद ई-यूपी देख लीजिए।

मुख्यमंत्री ने देश भर से सैकड़ों निवेशकों को बुलाने के बाद चुनाव प्रचार को महत्व दिया।

क्या है इन्वेस्ट नार्थ
सीआईआई हर साल इन्वेस्ट नार्थ का आयोजन कराती है। इसमें राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर के  निवेशक जुटते हैं और यूपी सहित करीब आधा दर्जन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बुलाया जाता है। 2012-13 में इन्वेस्ट नार्थ का आयोजन गुड़गांव में और 2013-14 का दिल्ली में हुआ। दोनों में ही मुख्यमंत्री को बुलाया गया था लेकिन सीएम नहीं गए।

सीआईआई एआरएम को भी नहीं दिया मौका
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) हर साल वार्षिक कार्यक्रम करती है। इसमें नौ राज्यों के प्रतिनिधि जुटते हैं। उद्यमियों से मुलाकात व निवेश संबंधी चर्चा के लिए मुख्यमंत्रियों को भी बुलाया जाता है। मगर दो एआरएम में से एक के लिए भी मुख्यमंत्री समय नहीं निकाल पाए।

यूएसआईबीसी के एजीएम में भी नहीं गए
अमेरिका-इंडिया बिजनेस कांउसिल का एक बड़ा डेलीगेशन मार्च में यूपी आया था। काउंसिल ने अपने वार्षिक अधिवेशन के मौके पर सीएम को आमंत्रित किया था। कई बड़े प्रोजेक्ट पर निवेश को लेकर चर्चा हुई थी। मगर इससे पहले मुख्यमंत्री की अमेरिका की एक अन्य यात्रा तय हो गई।

कुंभ की कामयाबी का प्रजेंटेशन देने वह अमेरिका गए। वहां कैबिनेट मंत्री आजम खां की तलाशी हुई तो न सिर्फ मुख्यमंत्री ने उस कार्यक्रम से मुंह मोड़ लिया बल्कि अमेरिका की दूसरी यात्रा भी टाल दी।
विज्ञापन


(इस खबर पर प्रतिक्रिया देने के लिए नीचे के बॉक्स में कमेट करें, शेयर करने के लिए फेसबुक शेयर बटन पर क्लिक करें)
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें