इस तरह लगता है ब्याज
नगर निगम बकाया गृहकर पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज लेता है। यदि आप एक साल गृहकर जमा नहीं करते हैं तो अगले साल उस 15 प्रतिशत ब्याज लग जाता है। उसके बाद भी जमा नहीं करते हैं तो आने वाले साल में पीछे वाले साल का ब्याज मूल टैक्स में जोड़ दिया जाता और फिर उस पर ब्याज लगाया जाता है। इस तरह यह चक्रवृद्धि ब्याज की तरह चलता है। ऐसे में जो लोग टैक्स जमा नहीं करते हैं उन पर ब्याज बढ़ता जाता है। कई बार निगम कर्मचारी भी कई साल पीछे से गृहकर रिवाइज कर देते हैं। जिस पर ब्याज भी उसी तरह लगा देते हैं।
लागू हो रहा नया सिस्टम
अभी नगर निगम के टैक्स इंस्पेक्टर गृहकर को अपने फायदे के लिए कम ज्यादा करते हैं तो उसकी जानकारी नगर निगम तक ही सीमित रहती है। ऐसे में मामला दबा रहता है लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। शासन के आदेश पर अब नगर निगम गृहकर का पूरा डेटा ई नगर सेवा पर भी शिफ्ट कर दिया गया है। ऐसे में कोई बदलाव होगा तो शासन के अधिकारी भी देख सकेंगे। ई नगर सेवा की सुविधा अब महीने में शुरू हो जाएगी। इसमें गृहकर जमा करने से लेकर उसके नामांतरण तक की सुविधा मिलेगी।
पूरे प्रदेश में होगा गृहकर का एक एप
नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय राय ने बताया कि अब पूरे प्रदेश में गृहकर का एक साफ्टवेयर ई नगर सेवा होगा। इसी के जरिए गृहकर निर्धारण और नामांतरण का काम होगा। होटल, अस्पताल, रेस्टोरेंट, नर्सिंग होम और शराब की दुकान आदि के लाइसेंस का काम ई नगर सेवा से ही हो रहा है। एक महीने के अंदर गृहकर से जुड़े सभी काम भी इसी से होंगे। अभी नगर निगम का सारा गृहकर का काम एनआईसी के साफ्टवेयर पर है।