बुंदेलखंड और पूवांर्चल क्षेत्रीय विकास योजना लोक निर्माण विभाग से हटाकर नियोजन विभाग को दिए जाने के बाद बजट भी बढ़ने जा रहा है। 2023-24 के बजट में चालू वित्त वर्ष की अपेक्षा अधिक आवंटन की तैयारी है। चालू वित्त वर्ष में दोनों निधियों के लिए 500 करोड़ की व्यवस्था है। बुधवार को पेश हो रहे बजट में 900 से 1000 करोड़ तक मिल सकता है।
प्रदेश सरकार ने गत वर्ष नवंबर में पूवांर्चल और बुंदेलखंड विकास निधियों के संचालन की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग से लेकर नियोजन विभाग को सौंप दी थी। इस फैसले के बाद लोक निर्माण विभाग चालू वित्त वर्ष में इन निधियों से संबंधित कार्यों की स्वीकृति नियोजन विभाग की सहमति लेकर ही देने की कार्यवाही कर रहा है। वित्तीय वर्ष 2023-24 से इन निधियों के लिए बजट प्रावधान नियोजन विभाग ही कराने जा रहा है। इस बदलाव के लिए संतुलित क्षेत्रीय विकास निधि (पूवांर्चल और बुंदेलखंड) के मार्गदर्शी सिद्धांतों में संशोधन भी कर दिया गया है।
सूत्रों ने बताया कि नियोजन विभाग ने पूवांर्चल व बुंदेलखंड क्षेत्रीय विकास निधि के लिए 1700 करोड़ रुपये से अधिक की मांग की है। इसमें करीब 1000 करोड़ रुपये निधियों के लिए और करीब 700 करोड़ रुपये पुराने कार्यों से जुड़ी देनदारी से संबंधित हैं। सब कुछ उम्मीद के हिसाब से हुआ तो 900 करोड़ से 1000 करोड़ रुपये के बीच बजट से मिल सकता है। शासन के एक अधिकारी ने बताया कि नियोजन विभाग मुख्यमंत्री के अधीन आता है और पूवांर्चल व बुंदेलखंड विकास बोर्ड इसी विभाग के अंतर्गत पहले से काम कर रहे हैं। ऐसे में इन कार्यों को तवज्जो मिलना तय है।
इसलिए स्थापित हैं ये निधियां
प्रदेश में पूवांर्चल और बुंदेलखंड क्षेत्र के जिलों में क्षेत्रीय विषमताओं व पिछड़ेपन को कम करने तथा संतुलित विकास के लिए पूवांर्चल व बुंदेलखंड निधियों की अलग-अलग व्यवस्था है। लोक निर्माण विभाग के बजट में पूवांर्चल विकास निधि के लिए पूंजीगत मद में 315 करोड़ और बुंदेलखंड विकास निधि के लिए 185 करोड़, कुल 500 करोड़ का प्रावधान है। वित्त वर्ष 2023-24 से इन निधियों के लिए नियोजन विभाग प्रशासकीय विभाग के रूप में बजट आवंटित करा रहा है।