भाजपा ने इससे पहले लखनऊ स्नातक से इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह, आगरा स्नातक से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक से डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, लखनऊ शिक्षक से उमेश द्विवेदी और मेरठ शिक्षक से श्रीचंद्र शर्मा को प्रत्याशी बनाया था। इन पांचों को पार्टी ने दोबारा मौका दिया है। इस तरह भाजपा ने पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं।
प्रदेश संगठन के गठन के बाद भाजपा ने शिक्षक और स्नातक सीटों पर एमएलसी चुनाव में भी सामाजिक समीकरण पर खास फोकस किया है। इनमें भाजपा ने 11 सीटों में से सबसे अधिक पांच सीटों पर ब्राम्हण चेहरों को मौका दिया है। जबकि ओबीसी के तीन, राजपूत के दो और वैश्य जाति से एक प्रत्याशी को मैदान में उतारकर जातीय और क्षेत्रीय समीकरण को साधने का प्रयास किया गया है।
विधान परिषद का यह चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग मतदाता समूह के बीच होता है। इसके बावजूद 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इसे भाजपा के लिए संगठनात्मक संपर्क और शिक्षक-स्नातक वर्ग के बीच पहुंच परखने के मौके के रूप में देखा जा रहा है। इन सीटों पर लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक दलों और शिक्षक संगठनों का प्रभाव रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए चुनौती केवल अपने प्रत्याशियों को जिताने की नहीं, बल्कि इन निर्वाचन क्षेत्रों में संगठन और मतदाता नेटवर्क को प्रभावी बनाने की भी होगी।
23 अक्तूबर को मतदान, 27 को नतीजे
11 सीटों के लिए 23 अक्तूबर को मतदान होगा और 27 अक्तूबर को मतगणना होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख छह अक्तूबर और नाम वापसी की अंतिम तारीख नौ अक्तूबर है। मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल छह दिसंबर को समाप्त हो रहा है।