राष्ट्रीय परशुराम परिषद द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में श्री परशुराम राष्ट्रीय शोध पीठ की स्थापना के लिए राज्य सरकार को औपचारिक प्रस्ताव सौंपा गया है। बुधवार को लखनऊ विधानसभा में उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. योगेन्द्र उपाध्याय से भेंटकर राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक अध्यक्ष पं. सुनील भराला (पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार) एवं महासचिव परशुराम राष्ट्रीय शोधपीठ, प्रो. डॉ. राजाराम यादव (पूर्व कुलपति, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर) ने संयुक्त रूप से ज्ञापन सौंपा।
इस दौरान प्रदेश के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों—चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ; वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर; तथा बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी—में श्री परशुराम राष्ट्रीय शोध पीठ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया।
पं. सुनील भराला ने बताया कि यह शोध पीठ पं. दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की तर्ज पर स्थापित की जाएगी। जहां भगवान परशुराम के एकात्मक जीवन दर्शन, आध्यात्मिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं वैश्विक एकात्मता से जुड़े विषयों पर शोध कार्य होगा।
उन्होंने कहा कि यह पहल युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी। परिषद द्वारा इसके लिए वर्तमान बजट सत्र में अधिनियम पारित कराकर वार्षिक ₹45 लाख (प्रति शोध पीठ ₹15 लाख) के बजट प्रावधान का अनुरोध किया गया है।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. योगेन्द्र उपाध्याय ने आश्वस्त किया कि परशुराम राष्ट्रीय शोध पीठ की स्थापना के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाएगा तथा इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी।
श्री परशुराम राष्ट्रीय शोध पीठ के अध्यक्ष आचार्य के. वी. कृष्णन एवं महासचिव प्रो. डॉ. राजाराम यादव ने कहा कि यह शोध पीठ अकादमिक जगत में भारतीय ज्ञान परंपरा को सशक्त आधार देगी और शोधार्थियों को नई दिशा प्रदान करेगी। राष्ट्रीय परशुराम परिषद को पूर्ण विश्वास है कि राज्य सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेते हुए आवश्यक कदम उठाएगी।