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यूपी: मायावती बोलीं- अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए, तभी आकाश की वापसी पर विचार हो सकता है

Wed, 09 Sep 2026 03:08 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ

सार

बसपा ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया है। पार्टी ने अशोक सिद्धार्थ पर निजी और पारिवारिक स्वार्थ को मिशन से ऊपर रखने का आरोप लगाया। नेतृत्व ने उनसे राजनीति से संन्यास लेने की अपील की, ताकि आकाश आनंद पार्टी में स्वतंत्र रूप से सक्रिय होकर जिम्मेदारियां संभाल सकें।
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मायावती के साथ आकाश आनंद। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद की जिम्मेदारियां बहाल करने के लिए शर्त रखी है। उन्होंने कहा कि यदि आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ राजनीति से सन्यास लेते हैं तभी आकाश स्वतंत्र होकर पार्टी में काम कर पाएंगे। पार्टी आकाश की जिम्मेदारियां वापस करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। बसपा सुप्रीमो ने आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ को खरी-खरी भी सुनाई है।

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बसपा सुप्रीमो ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि पार्टी ने अशोक सिद्धार्थ को कई बार सुधरने का मौका दिया, लेकिन बसपा के मिशन से अधिक उन्होंने अपने निजी एवं पारिवारिक स्वार्थ और महत्वाकांक्षा को महत्व दिया, जिसका खामियाजा उनके दामाद आकाश आनंद को भुगतना पड़ा है। उन्होंने अपने स्वार्थ में आकाश और बसपा मूवमेंट की भी परवाह नहीं की। उनको औरों से कहीं अधिक बढ़कर त्याग व कुर्बानी की मिसाल देनी चाहिए थी। लेकिन इसके उलट होता रहा। 

 

अशोक सिद्धार्थ के पास अभी मौका

ऐसे में पार्टी मूवमेंट के हित के साथ खुद उनके परिवार एवं दामाद आकाश आनंद के भविष्य को ध्यान में रखकर अशोक सिद्धार्थ के पास अभी मौका है कि अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को त्यागकर राजनीति से संन्यास ले लें। उन्होंने आगे कहा कि शीर्ष नेतृत्व भूले-भटके लोगों के व्यवहार को ध्यान में रखकर शामिल कर रहा है। जो इसकी राह में रुकावट बन रहे हैं, उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की जा रही है। इसका उदाहरण पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ हैं।
 
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तीन राज्य सबसे अहम

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि यूपी, उत्तराखंड व पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक है। ये तीनों राज्य बसपा व बहुजन मूवमेंट के लिए विशेष हैं। इसे ध्यान में रखकर ही बसपा के सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ता, पदाधिकारी, समर्थक एवं शुभचिंतक सत्ता प्राप्ति की मुहिम में डटे हैं।

विरोधी पार्टियों तथा जातिवादी तत्वों आदि से बहुजन समाज और बसपा को आरक्षण आदि को लेकर उत्पन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दलित समाज के लोगों को निजी या पारिवारिक स्वार्थ में ऐसा कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए जो इसमें बाधा बने और इतिहास उन्हें माफ नहीं कर पाये।
 
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