विभूतिखंड के होटल मैरियट में ठहरे त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा की सुरक्षा में बड़ी चूक का मामला सामने आया है। दिल्ली के शकरपुर का रहने वाला प्रशांत मोहन नाम का जालसाज खुद को आईआरएस अफसर बातकर सुरक्षा को भेदते हुए सीएम के कमरे तक पहुंच गया। शक होने पर जांच हुई तो उसके पास से फर्जी आईडी कार्ड, फर्जी विजिटिंग कार्ड मिला। तत्काल उसको गिरफ्तार किया गया।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मैरियट होटल के कमरा नंबर 731 में प्रशांत मोहन ठहरा हुआ था। 31 अक्तूबर को होटल में ही त्रिपुरा के सीएम माणिक साहा भी ठहरे थे। इस बारे में जब प्रशांत मोहन को पता चला तो वह उनसे मिलने की फिराक में जुट गया। कुछ देर के बाद वह सीएम माणिक साहा से मिलने के लिए उनके कमरे तक पहुंच गया। उसने सुरक्षा कर्मियों को बताया कि वह भारत सरकार के वित्त मंत्रालय में आईआरएस अधिकारी है। खुद को एडिशनल कमिश्नर बताते हुए आईडी कार्ड दिखाया। कार्ड आदि देखकर सुरक्षाकर्मियों को संदिग्धता हुई। तुरंत उसको विभूतिखंड पुलिस के हवाले किया गया।
कमरे से मिले जालसाजी के सुबूत
होटल के जिस कमरे में वह ठहरा था, वहां से वित्त मंत्रालय का फर्जी आईडी कार्ड, आईएएस अधिकारी का एक फर्जी विजिटिंग कार्ड, एक आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, ट्राली बैग, 1600 रुपये और एक आईफोन मिला है। पूछताछ की गई तो उसने बताया कि वह फर्जी आईआरएस अधिकारी बनकर त्रिपुरा के सीएम से मिलने पहुंचा। पूछताछ के बाद विभूतिखंड थाने में तैनात दरोगा ज्ञान प्रकाश सिंह ने उसके खिलाफ विभूतिखंड थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी का केस दर्ज कराया। इंस्पेक्टर विभूतिखंड अमर सिंह का कहना है कि आरोपी होटल से चेक आउट करके भाग गया था।
तीन दिन से होटल में ठहरा था प्रशांत
पूछताछ और होटल के दस्तावेज चेक करने पर पता चला कि आरोपी प्रशांत ने तीन दिन पहले होटल में चेक इन किया था। वह ऑनलाइन बच्चों को पढ़ाने का काम करता है। पूछताछ में उसने इस बात का खुलासा किया है कि वह फर्जी आईआरएस और आईएएस अधिकारी बन लोगों पर रौब गांठता था और अपना काम करवाता था। अब विभूतिखंड पुलिस आरोपी प्रशांत मोहन के बारे में दिल्ली पुलिस से और भी जानकारी जुटा रही है। अब तक पुलिस को उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं मिला है।