ज्योति के ससुर लक्ष्मीकांत मिश्रा ओपी चौधरी अस्पताल में सुपरवाइजर हैं। उनको अस्पताल के पास ही दो कमरे का दो कमरे का मकान पहली मंजिल पर मिला है। एक कमरे में लक्ष्मीकांत, उनकी पत्नी मंजू और बेटी आकांक्षा रहते हैं, जबकि दूसरे कमरे में बेटा आशीष व बहू ज्योति रहते हैं।
आकांक्षा भी ओपी चौधरी अस्पताल में और आशीष लेबर सप्लाई का काम करते हैं। लक्ष्मीकांत के अनुसार रोज की तरह बुधवार सुबह वह, बेटी व बेटा काम पर चले गए। घर पर बहू ज्योति और पत्नी मंजू थे। दोपहर मंजू भी बाजार खरीदारी करने चली गई। वह अपने कमरे में ताला लगाकर चाबी ज्योति को दे गई।
दो बदमाशों ने की लूटपाट
ज्योति के अनुसार दोपहर दो बजे उनको ससुर के कमरे में खटपट का एहसास हुआ। वह अपने कमरे से बाहर निकली तो नकाबपोश दो बदमाश ससुर के कमरे में नजर आए। ज्योति को देखते ही बदमाश उनपर टूट पड़े और उनका गला दबाने का प्रयास किया। ज्योति ने शोर मचाने की कोशिश तो बदमाशों ने उनके सिर पर किसी लोहे के हथियार से वार कर उनको बेहोश कर दिया। आरोप है कि इसके बाद बदमाश घर से 15 लाख के जेवर और 20 हजार रुपये नकद लूट ले गए।
चार बजे ननद पहुंची तो घटना का पता चला
शाम करीब चार बजे लक्ष्मीकांत की बेटी आकांक्षा ड्यूटी से घर पहुंची तो कमरे का दरवाजा खुला मिला। भाभी ज्योति बेहोश पड़ी थी। आकांक्षा ने शोर मचा दिया। आसपास के लोग मदद के लिए पहुंचे और बेहोश ज्योति को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनको छुट्टी दे दी गई। दिनदहाड़े लूटपाट की सूचना पाकर मौके पर एडीसीपी साउथ रल्लापल्ली वसंथ कुमार, एसीपी गोसाईंगंज ऋषभ यादव और पीजीआई पुलिस भी पहुंच गई।
काफी जेवर तख्त के नीचे मिले, ज्योति की भूमिका संदिग्ध
एडीसीपी ने बताया कि पुलिस ने जब छानबीन शुरू की तो काफी जेवर एक तख्त के नीचे मिल गए। घायल ज्योति यह नहीं बता सकी कि बदमाश किधर से घर में दाखिल हुए थे। ससुर के कमरे का ताला सुरक्षित मिला। मकान के नीचे रहने वाले एक परिवार ने भी किसी संदिग्ध को आते-जाते नहीं देखा। एडीसीपी का कहना है कि अब तक की गई छानबीन में लूटपाट की घटना संदिग्ध लग रही है। पीड़ित ने भी कोई तहरीर नहीं दी है। बाकी पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।