अहिमामऊ में मिली 83 हजार स्क्वायर फीट से अधिक भूमि
उत्तर प्रदेश परिवहन आयुक्त उत्तर के निर्देश पर लखनऊ में डिटेंशन यार्ड के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बाद नगर आयुक्त लखनऊ से जमीन उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। नगर निगम की ओर से ग्राम अहिमामऊ में 0.780 हेक्टेयर (83,958 स्क्वायर फीट) भूमि परिवहन विभाग द्वारा निरुद्ध वाहनों की पार्किंग के लिए अस्थायी रूप से उपलब्ध कराई गई।
अब तक 5628 वाहनों का चालान, 491 निरुद्ध
आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2026-27 में लखनऊ के प्रवर्तन दलों ने कुल 5,628 वाहनों का चालान किया है, जबकि 491 वाहनों को निरुद्ध किया गया। हालांकि वर्तमान में प्रवर्तन अधिकारियों के पास वाहनों को निरुद्ध करने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है। कई बार थानों में भी जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण वाहनों को निरुद्ध नहीं किया जा पाता और चालान करके वाहन छोड़ना पड़ता है।
यह समस्या नए डम्पिंग यार्ड के संचालन के बाद काफी हद तक दूर हो जाएगी। निर्धारित यार्ड उपलब्ध होने से कार्रवाई के बाद वाहनों को आसानी से निरुद्ध किया जा सकेगा। साथ ही वाहनों को निर्धारित परिसर में सुरक्षित रूप से रखा जा सकेगा।
पी-4 पार्किंग और कल्ली यार्ड से भी होगी व्यवस्था बेहतर
फिलहाल पी-4 पार्किंग और कल्ली यार्ड पीजीआई में वाहन खड़े किए जाते हैं। नए अहिमामऊ डम्पिंग यार्ड के उपलब्ध होने से इन स्थानों पर खड़े वाहनों को भी आवश्यकता के अनुसार नए यार्ड में शिफ्ट किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग स्थानों पर जब्त वाहनों के बिखरे रहने की समस्या कम होगी और वाहनों के लिए एक केंद्रीकृत व्यवस्था विकसित होगी।
शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी
नया डिटेंशन यार्ड सिर्फ परिवहन विभाग के लिए पार्किंग सुविधा नहीं है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जब्त या निरुद्ध वाहन लंबे समय तक थानों के आस-पास खड़े रहने से पुलिस परिसरों में जगह घिरती है।
कई स्थानों पर ऐसे वाहनों की वजह से अव्यवस्था भी पैदा होती है। अहिमामऊ यार्ड के संचालन के बाद कार्रवाई के बाद वाहनों को निर्धारित परिसर में भेजना संभव होगा। इससे थानों पर दबाव कम होगा, खुले स्थानों में वाहनों के जमावड़े में कमी आएगी और सड़क किनारे वाहनों के खड़े रहने से होने वाली यातायात संबंधी परेशानी कम होगी।