लोकसभा चुनाव की बयार जिले में तेजी से बह रही है। पड़ोसी देश नेपाल में भी इसका पूरा असर है। जिले से नेपाल की करीब 110 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है। रोटी-बेटी के संबंध में कारण यहां के लोगों के नेपाल से व्यापारिक के साथ पारिवारिक रिश्ते भी बनते हैं। इसी का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में दोहरी नागरिकता वाले चुनावों के समय यहां मतदान के लिए पहुंचते हैं, जबकि उनका घर नेपाल में है और परिवार भी नेपाल में ही रहता है।
सिर्फ चुनाव में वापसी
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सीमा से सटी रूपईडीहा नगर पंचायत में जो वोटर लिस्ट तैयार हुई है उसमें बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं जो अब पूरी तरह से पड़ोसी देश नेपाल में बस चुके हैं। इन जुगाड़ू वोटरों को मतदान के लिए बूथ तक लाया जाता है। नेपाल में होने वाले चुनाव के दौरान भी कुछ ऐसा ही कार्य भारतीय क्षेत्र में रहने वालों का नाम नेपाल की वोटर लिस्ट में शामिल कर किया जाता है।
110 किलोमीटर लंबी खुली सीमा
बहराइच जिले से नेपाल की करीब 110 किलोमीटर लंबी खुली सीमा लगती है। नानपारा व मिपींपुरवा दो तहसील भी इस दायरे में आती हैं, जबकि रूपईडीहा, नवाबगंज, मोतीपुर, मूर्तिहा व सुजौली पांच थाना क्षेत्र भी नेपाल से जुड़े हैं। पूरे क्षेत्र में कई जगह एसएसबी के बैरियर हैं और पुलिस टीमें भी जांच करती हैं। इसके बावजूद जंगली व अन्य रास्तों से सीमा पार आवाजाही की कोशिश होती है।
सीमा पर बिना पहचान पत्र के प्रवेश नहीं
नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी किसी भी व्यक्ति को बिना पहचान पत्र के आने व जाने नहीं देती। चाहे नेपाल का व्यक्ति हो या फिर भारत का, उसे पहचान पत्र दिखाना पड़ता है। चुनाव के मद्देनजर पुलिस ने इस समय सक्रियता और बढ़ा दी है। सोमवार को भी सीमा पर रूपईडीहा कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह के साथ पुलिस व एसएसबी टीम लगातार गश्त करती रही। सीमा से आने- जाने वालों की भी सघन जांच चलती रही।