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UP: लोकसभा के शोर के बीच दबे पांव गुजरा विधानसभा उपचुनाव, इन चार सीटों पर पड़े वोट; नहीं दिखी कोई जोर आजमाइश

Sun, 02 Jun 2024 09:40 AM IST
शाहरुख खान चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ

सार

लोकसभा के शोर के बीच विधानसभा उपचुनाव दबे पांव गुजर गया। चार सीटों पर विधानसभा उपचुनाव भी हो गए। उपचुनाव को लेकर ज्यादातर जगह जोर आजमाइश नहीं दिखी।
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UP Lok Sabha Election 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव के दौरान ही प्रदेश के चार विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव भी संपन्न हुए। उपचुनाव को लेकर सभी दल एड़ी-चोटी का जोर लगाते रहे हैं, लेकिन इस बार स्थितियां बदली हुई दिखीं। सभी की निगाह लोकसभा चुनाव पर रही। विधानसभा चुनाव पर फोकस नजर नहीं आया। 
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वर्ष 2022 की अपेक्षा उपचुनाव के मतदान में मतदाताओं की भी दिलचस्पी कम दिखी। वोटिंग में सर्वाधिक 10 फीसदी की गिरावट दुद्धी विधानसभा क्षेत्र में हुई है। लखनऊ पूर्वी- भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे आशुतोष टंडन के निधन के बाद पार्टी ने यहां से ओपी श्रीवास्तव पर दांव लगाया। सपा ने यह सीट कांग्रेस को दी। 

पार्षद मुकेश सिंह चौहान मैदान में उतरे। यहां चुनाव लड़ने को लेकर सपा और कांग्रेस के स्थानीय कार्यकर्ताओं में सिर फुटौव्वल की नौबत दिखी, लेकिन मैदान में मुकेश सिंह ही डटे रहे। उपचुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस की तरफ से कोई खास दांवपेंच नहीं दिखे। स्थानीय नेता ही मैदान में रहे। 
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20 मई को हुए मतदान में वर्ष 2022 की अपेक्षा 3.38 फीसदी गिरावट के साथ 52.54 फीसदी मतदान हुआ। ददरौल- भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह के निधन के बाद उनके बेटे अरविंद सिंह को पार्टी ने मैदान में उतारा। 

इंडिया गठबंधन ने उनके सामने बसपा सरकार में राज्यमंत्री रहे अवधेश वर्मा पर दांव लगाया। यहां भी उपचुनाव को दोनों दल प्रतिष्ठा का सवाल बनाते नहीं दिखे। 13 मई को हुए उपचुनाव में वर्ष 2022 की अपेक्षा 2.84 फीसदी की गिरावट के साथ 58.66 फीसदी मतदान हुआ।

 

गैंसड़ी- सपा विधायक डॉ. शिव प्रताप यादव के निधन से खाली हुई। यहां सपा ने डॉ. शिव प्रताप के बेटे राकेश कुमार यादव पर दांव लगाया। सहानुभूति बटोरने की कोशिश की गई। भाजपा ने पूर्व विधायक शैलेंद्र सिंह शैलू को मैदान में उतारा। वे 2022 में डॉ. शिव प्रताप से मात खाए थे। यहां भी मैदान में उत्साह नहीं दिखा। यहां 0.80 फीसदी की गिरावट के साथ 50.99 फीसदी मतदान हुआ।

 

दुद्धी- प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित दुद्धी विधानसभा सीट पर उपचुनाव रोचक है। भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को दुष्कर्म मामले में सजा होने और अदालत से अयोग्य ठहराने के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ। भाजपा ने संघ से जुड़े श्रवण गोंड पर तो सपा ने सात बार विधायक रहे विजय सिंह गोंड पर दांव लगाया है। यहां कुल 3.18 लाख मतदाताओं में करीब 48 हजार गोंड बिरादरी के हैं। 

 
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भाजपा इस गढ़ को बचाने के लिए अंतिम समय तक एड़ी-चोटी का जोर लगाती रही। यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा उपचुनाव के लिए जनसभा कर जोर लगाया। इसके बाद भी वर्ष 2022 की अपेक्षा 10 फीसदी गिरावट के साथ 54.40 फीसदी ही मतदान हुआ।
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