आबकारी विभाग की भूमिका भी इस दौरान और मजबूत हुई है। वर्ष 2024-25 में कर और करेतर राजस्व में आबकारी विभाग ने 52574.52 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जो कुल राजस्व का 23.29 प्रतिशत है। वहीं, राज्य कर विभाग ने 114637.54 करोड़ रुपये के साथ 50.79 प्रतिशत की हिस्सेदारी दर्ज की। इस तरह कुल राजस्व ढांचे में आबकारी विभाग जीएसटी के बाद दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहा। राजस्व विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोग में बढ़ोतरी, नीति में बदलाव और बेहतर वसूली व्यवस्था से शराब से मिलने वाले कर में उछाल आया है। साफ है कि कर वृद्धि की दौड़ में शराब ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन जैसे पारंपरिक मजबूत स्रोतों को पीछे छोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बना दिया है।