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यूपी: कब्रिस्तान की जगह निकला खेत, कृषि भूमि को गलत तरीके से दर्ज किया; वक्फ न्यायाधिकरण ने हटाई प्रविष्टि

Thu, 27 Aug 2026 06:28 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

मुजफ्फरनगर में कृषि भूमि को वर्षों तक गलत तरीके से वक्फ कब्रिस्तान दर्ज किया गया। जांच में वहां खेती, फसल और पेड़ मिले, जबकि कब्रिस्तान के कोई निशान नहीं पाए गए। उत्तर प्रदेश वक्फ न्यायाधिकरण ने प्रविष्टि निरस्त कर एक माह में वास्तविक मालिकों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करने का आदेश दिया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Grok AI
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विस्तार
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मुजफ्फरनगर की एक कृषि भूमि को वर्षों तक वक्फ कब्रिस्तान दर्ज रखा गया, जबकि रिकॉर्ड से लेकर मौके की जांच तक में वहां खेती होने और कब्रिस्तान न होने की बात सामने आई। अब उप्र वक्फ न्यायाधिकरण ने इस प्रविष्टि को गलत मानते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायाधिकरण ने मुजफ्फरनगर के पलड़ी गांव की 1.14 बीघा भूमि से वक्फ संपत्ति और कब्रिस्तान की प्रविष्टि हटाने तथा एक माह के भीतर वादीगण का नाम दर्ज करने की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

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यह मामला तहसील बुढ़ाना के ग्राम पलड़ी की गाटा संख्या 31, वर्तमान नंबर 61 की भूमि से जुड़ा है। वादी कृपाल सिंह सैनी, धर्मपाल सिंह, सोमपाल सिंह और ओमपाल सिंह का कहना था कि विवादित भूमि शुरू से कृषि भूमि रही है। पुराने राजस्व अभिलेखों में भी इसके पूर्व मालिकों के नाम दर्ज थे और वादीगण के परिवार ने बैनामे के जरिए जमीन खरीदी थी।

 

 

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अभिलेखों में भी इसे वक्फ कब्रिस्तान दर्ज कर दिया गया

सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण के सामने पेश रिकॉर्ड में वक्फ निरीक्षक की सर्वे रिपोर्ट भी अहम साबित हुई। इसमें साफ कहा गया था कि गाटा संख्या 31 कब्रिस्तान नहीं बल्कि काश्त की भूमि है, जबकि कब्रिस्तान दूसरे गाटा नंबर में स्थित है। इसके बावजूद वक्फ सूची में गाटा संख्या 31 को कब्रिस्तान के रूप में शामिल कर लिया गया। बाद में इसी आधार पर चकबंदी और राजस्व अभिलेखों में भी इसे वक्फ कब्रिस्तान दर्ज कर दिया गया।

उपजिलाधिकारी और चकबंदी अधिकारियों की जांच रिपोर्ट में भी मौके पर खेती होने की बात सामने आई। कमीशन रिपोर्ट में विवादित भूमि पर फसल और यूकेलिप्टिस के पेड़ होने का उल्लेख है, जबकि किसी कच्ची या पक्की कब्र का उल्लेख नहीं मिला।

 

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न्यायाधिकरण ने कही ये बात

न्यायाधिकरण ने कहा कि केवल वक्फ सूची में दर्ज होने के आधार पर भूमि को वक्फ संपत्ति नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब सर्वे और अन्य अभिलेख स्वयं उसकी प्रकृति कृषि भूमि बताते हों। पीठ ने माना कि गाटा संख्या 31 को उसकी वास्तविक प्रकृति के विपरीत कब्रिस्तान के रूप में दर्ज किया गया।

उप्र वक्फ न्यायाधिकरण अध्यक्ष प्रहलाद सिंह और सदस्यों राम सुरेश वर्मा व ओम प्रकाश की पीठ ने उभय पक्षों को सुनने व अभिलेखों के परीक्षण के उपरांत वक्फ बोर्ड और संबंधित राजस्व अधिकारियों को एक माह के भीतर वक्फ कब्रिस्तान की प्रविष्टि निरस्त कर वादीगण का नाम दर्ज करने की कार्रवाई पूरी करने का आदेश दिया है।
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