प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने विद्यालयों में लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली के लिए केपीआई प्रणाली लागू की है। अब योजनाओं की प्रगति, शिक्षण गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं, डिजिटल डाटा, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न कार्यक्रमों की नियमित मॉनिटरिंग होगी। प्रदर्शन के आधार पर समीक्षा और सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
प्रदेश में विद्यालयी शिक्षा के कामकाज को लक्ष्य आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। बेसिक शिक्षा विभाग ने समग्र शिक्षा के अंतर्गत जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए 'की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स' (केपीआई) तय कर दिए हैं। अब विभाग की सभी प्रमुख योजनाओं की प्रगति निर्धारित मानकों के आधार पर परखी जाएगी।
केपीआई में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी, कैच-अप कार्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण, मास्टर ट्रेनर्स की क्षमता वृद्धि, कक्षा शिक्षण की गुणवत्ता, अधिगम स्तर का मूल्यांकन, नियमित शैक्षणिक अनुश्रवण तथा विद्यालयों में समय-सारिणी के प्रभावी अनुपालन को प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों में शामिल किया गया है। इसके साथ ही प्रेरणा पोर्टल, दीक्षा, एनबीएमसी, यू-डाइस तथा अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समयबद्ध डाटा अपडेट भी अनिवार्य रहेगा।
विद्यालय निर्माण, ऑपरेशन कायाकल्प, स्वीकृत निर्माण परियोजनाओं की प्रगति, जर्जर भवनों के निस्तारण, आधारभूत सुविधाओं के विकास, फर्नीचर की उपलब्धता तथा अन्य संसाधनों की स्थिति की नियमित समीक्षा होगी। वहीं बाल वाटिका के अंतर्गत नामांकन, विद्यालय तैयारी कार्यक्रम, टीएलएम की उपलब्धता, गतिविधि आधारित शिक्षण और नियमित निरीक्षण को भी केपीआई में शामिल किया गया है।
आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित बच्चों का सत्यापन, आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों का चिह्नांकन एवं नामांकन, शारदा कार्यक्रम, विद्यालय प्रबंधन समितियों की सक्रियता, सामुदायिक सहभागिता, पुस्तक वितरण तथा पीएम श्री विद्यालयों में निर्धारित गतिविधियों की नियमित समीक्षा की जाएगी। समेकित शिक्षा के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, मूल्यांकन, सहायक उपकरणों की उपलब्धता, यू-डाइस अद्यतन तथा समावेशी शिक्षा से जुड़े सभी संकेतकों की भी सतत मॉनिटरिंग होगी।
केपीआई में मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस), विभिन्न पोर्टलों पर डाटा की गुणवत्ता, वित्तीय प्रगति, समयबद्ध व्यय, लंबित प्रकरणों के निस्तारण, निरीक्षण, समीक्षा बैठकों के अनुपालन तथा विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को भी शामिल किया गया है। प्रत्येक माह जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर लक्ष्य प्राप्ति के आधार पर समीक्षा की जाएगी।