कारागार विभाग में लिपिकों के प्रमोशन में विसंगति मामले की फाइल एक बार फिर मुख्यालय स्तर पर दबा दी गई है। अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए शासन ने मामले की रिपोर्ट तलब की थी। बावजूद इसके मुख्यालय के बाबुओं ने फाइल को आगे भेजने के बजाय उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया। तय समय सीमा बीतने पर भी रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी गई।
इससे विभागीय कर्मचारियों में नाराजगी है। बार-बार शिकायत करने पर भी विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उल्लेखनीय है कि कारागार विभाग में एक ही विज्ञापन से नौकरी पाए लिपिक संवर्ग के एक ही पद के कर्मियों ने सौतेले व्यवहार का आरोप लगाया है।
जेल मुख्यालय में कनिष्ठ लिपिक के पद पर तैनात कर्मचारी प्रमोशन पाकर प्रशासनिक व मुख्य प्रशासनिक अधिकारी बन गए और वे मुख्यालय में ही हमेशा तैनात रहे। वहीं, जेलों में तैनात कनिष्ठ लिपिक महज एक प्रमोशन पाकर प्रधान लिपिक से रिटायर हो गए। यही नहीं, इनका लगातार प्रदेश की जेलों में तबादला भी होता रहा।