आज के मानसून में वही पैटर्न क्यों दिख रहा है?
वैज्ञानिकों का कहना है कि अब कुल बारिश से ज्यादा उसकी वितरण प्रणाली बदल रही है। बारिश वाले दिन घट रहे हैं, लेकिन कम समय में ज्यादा वर्षा हो रही है। इससे फ्लैश फ्लड, शहरी जलभराव, अधिक नमी के कारण बढ़ता हीट इंडेक्स और अचानक गर्मी जैसी स्थितियां बन रही हैं। विशेषज्ञ इसे उभरती हुई''''फ्लड-ड्रॉट साइकिल'''' मान रहे हैं, जो भविष्य में और गंभीर हो सकती है।
जून रहा कमजोर, जुलाई भी चुनौतीपूर्ण
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार जून 2026 में देश में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई, जिससे यह 1901 के बाद पांचवां सबसे शुष्क जून बन गया। जुलाई में भी सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई गई है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश के दौर आ सकते हैं।
क्यों कमजोर पड़ा मानसून
जून में मानसूनी हवाएं अधिकांश समय कमजोर रहीं। मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (एमजेओ) अनुकूल स्थिति में नहीं था, उत्तर हिंद महासागर में प्री-मानसून लो-प्रेशर सिस्टम और चक्रवात भी लगभग नहीं बने। इसके साथ ही मजबूत एल-नीनो ने भी मानसून पर दबाव डाला।
जून में देश में सामान्य 165.3 मिमी के मुकाबले केवल 99.5 मिमी बारिश हुई। यह सामान्य से 39.8 प्रतिशत कम है। मानसून केरल तीन दिन देरी से पहुंचा और पश्चिम व मध्य भारत में करीब दो सप्ताह तक उसकी प्रगति लगभग थमी रही। इसका सीधा असर खरीफ बुवाई पर पड़ा। धान, मक्का, कपास और सोयाबीन जैसी फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में काफी पीछे चल रही है।