विकास के दावे कर रही केंद्र और राज्य सरकार गरीबों को दो जून की रोटी और रोजगार तक नहीं दे पा रही है। खाद्य व रोजगार की सुरक्षा नहीं मिलने से अकेले यूपी की ही आधी आबादी कुपोषण का शिकार है। यह बातें गुरुवार को माकपा नेता वृंदा करात ने कहीं। वह यहां खेत मजदूर यूनियन के प्रदर्शन में शामिल होने आई थीं।
बाद में मुख्यमंत्री आवास जाकर यूनियन के पदाधिकारियों ने सीएम अखिलेश यादव को एक ज्ञापन भी दिया। इसमें गरीबों को खाद्य और रोजगार की सुरक्षा देने की मांग की गई है।
माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात का कहना था कि केंद्र और राज्य सरकार गरीबों को रोजगार व रोटी देने में नाकाम साबित हो रही है। प्रदेश की आधे से अधिक जनता गरीब है और उसके सामने दो जून की रोटी का संकट है।
जनता कुपोषण ओर खून की कमी से जूझ रही है। इनकी प्रमुख समस्या रोजगार, रोटी, आवास, स्वास्थ्य और सामाजिक सम्मान की है। ग्रामीण गरीबों में तो रोजगार का संकट और गहराता जा रहा है।
तत्काल लागू हो खाद्य सुरक्षा कानून
इससे पहले खेत मजदूर यूनियन के बैनर तले एक जुलूस चारबाग से विधानभवन तक गया। यहां से प्रदर्शनकारी दयानिधान पार्क, लालबाग पहुंचे। मजदूरों ने खेत मजदूरों के हित में सर्व समावेशी कानून बनाने, खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने और भूमिहीनों को भूमि देने की मांग की।
प्रदर्शन में शामिल यूनियन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाषिनी अली ने कहा कि मनरेगा में बजट आवंटन में कमी तथा इसे लागू करने में कमजोर इच्छाशक्ति के चलते गांव के लोग शहरों को पलायन करने पर मजबूर हो रहे हैं। इसे रोकने की जरूरत है। उन्होंने मांग की कि खाद्य सुरक्षा कानून तुरंत लागू किया जाए। दलितों की बंद योजनाएं शुरू करने की मांग भी उन्होंने उठाई।
उन्होंने कहा, आज भी ग्रामीण इलाकों में आवास, पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। ग्रामीण दस्तकार कुम्हार, बुनकर, लोहार, बढ़ई, नाई आदि के धंधे चौपट हो जाने से वे शहर का रास्ता पकड़ रहे हैं।
प्रदर्शन में यूनियन के सहसचिव सुनीत चोपड़ा, माकपा सचिव एसपी कश्यप, राज्य महासचिव बृजलाल भारती, यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष ब्रह्म स्वरूप, राज्य उपाध्यक्ष अंबिका प्रसाद मिश्र, रामजग, जयलाल सरोज व सतीश कुमार भी शामिल रहे।