यूपी में बतौर मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष मेरा अनुभव बिल्कुल अच्छा नहीं है। यहां घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, भ्रूण हत्या, शोषण के मामले ज्यादा सामने आते हैं। यह कहना है न्यायमूर्ति तरुण चटर्जी का।
वे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘वैश्वीकरण, विधि एवं मानवाधिकारों का संरक्षण : मुद्दे एवं चुनौतियां’ विषय पर सोमवार को राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
न्यायमूर्ति चटर्जी ने कहा कि यूपी में स्थिति में सुधार के लिए स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी स्तर पर मानवाधिकार की पढ़ाई करवाई जाए। ताकि सभी को मानवाधिकार हनन के बारे में जागरूक किया जा सके।
कभी-कभी हम अपने अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में ढंग से जागरूक न होने के कारण हनन का शिकार बनते हैं। स्त्री और पुरुष के मौलिक अधिकारों की सही जानकारी न होने के अभाव में भी हम हनन का शिकार बन जाते हैं।