विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की रविवार को फील्ड हॉस्टल में हुई बैठक में चेतावनी दी गई कि बिजली कर्मियों पर की गई उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां वापस नहीं ली गईं, तो आने वाली गर्मियों में बिजली व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसकी पूरी जिम्मेदारी पाॅवर कॉर्पोरेशन के शीर्ष प्रबंधन की होगी। समिति ने 15 अप्रैल से 21 मई तक प्रदेशव्यापी जनजागरण अभियान चलाने की घोषणा की है।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि प्रबंधन अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए किसी भी कर्मचारी या अभियंता पर कार्रवाई करता है, तो बिजली कर्मी काम छोड़कर बाहर आने को बाध्य होंगे। समिति ने आरोप लगाया कि एक ओर बिजली कर्मियों का उत्पीड़न हो रहा है, वहीं दूसरी ओर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर संविदा कर्मियों की बड़े पैमाने पर छंटनी की जा रही है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जनजागरण अभियान के तहत केंद्रीय पदाधिकारी पूरे प्रदेश का दौरा करेंगे और प्रत्येक जनपद में बिजली उपभोक्ताओं तथा किसानों के साथ संयुक्त सभाएं करेंगे। बैठक को संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे, राहुल बाबू कटियार और जितेंद्र सिंह गुर्जर आदि ने संबोधित किया।
डिस्कॉम मुख्यालयों पर प्रदर्शन
व्यापक जनजागरण अभियान के तहत विभिन्न डिस्कॉम मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन भी किए जाएंगे। इनमें 24 अप्रैल को मेरठ डिस्कॉम, 2 मई को केस्को, 6 मई को आगरा, 14 मई को लखनऊ और 21 मई को वाराणसी डिस्कॉम पर प्रदर्शन होगा।