ज्यादातर घपला सीएससी से हुआ
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि मुख्यतया गैर ऋणी कृषकों का बीमा कामन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से होता है। इन सेंटरों द्वारा बीमा करते समय किसान से संबंधित दस्तावेज लिए जाते हैं। किसानों के आधार संख्या, खसरा खतौनी की प्रति, बटाईदार/किरायेदार के रूप में भूमि मालिक के साथ हुए अनुबन्ध की प्रति. फसल बुवाई संबंधित स्वलिखित प्रमाण पत्र, बैंक पास बुक अपलोड किया जाता है।
दस्तावेजों में हेरफेर करके इसे अपलोड किया गया है। इसी तरह भू-अभिलेख के डाटा को एनसीआईपी पोर्टल से इन्ट्रीगेट किया गया है, जिससे बीमा कराते समय किसान के पास उपलब्ध भूमि का सत्यापन हो जाता है। लेकिन, जिन गांवों में चकबंदी चल रही है अथवा चकबंदी के लिए सर्वे में शामिल हैं, उन गांवों का भूमि संबंधी डाटा का सत्यापन पोर्टल पर नहीं हो पाता है। मनमानी करने वालों ने इसका फायदा उठाया। यही वजह है कि जहां बड़े पैमाने पर घपले हुए हैं, वे गांव चकबंदी में शामिल हैं।