रोमांचकारी फार्मूला वन रेस से सरकार को हर साल करीब 36 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में मिलने का अनुमान है।
सुप्रीम कोर्ट से फैसला सरकार के पक्ष में आने के बाद फार्मूला वन रेस को टैक्स फ्री करने संबंधी जून 2011 में जारी किया गया आदेश रद्द करने संबंधी आदेश शीघ्र ही जारी करने की तैयारी है।
फार्मूला वन रेस के लिए बिकने वाले टिकट पर 25 प्रतिशत मनोरंजन कर के रूप में लिया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर में जेपी स्पोर्ट्स इंटरनेशनल लि. ग्रैंड प्रिक्स ऑफ इंडिया फार्मूला वन रेस आयोजित कराता है।
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नोएडा में आयोजित होने वाले इस रेस की शुरुआत वर्ष 2011 में हुई। इस रेस में देश ही नहीं दुनिया भर के लोग आते हैं। इससे करोड़ों रुपये का मुनाफा रेस कराने वाली कंपनी को होता है।
तत्कालीन मायावती सरकार ने इस रेस को टैक्स फ्री कर दिया था। इस संबंध में 27 जून 2011 को आदेश जारी किया गया था। प्रदेश में सत्ता बदलने के बाद से ही इस रेस को टैक्स के दायरे में लाने की कवायद चल रही है।
नगर विकास मंत्री मो. आजम खां की अध्यक्षता में गठित आय संसाधन समिति ने फार्मूला वन रेस को टैक्स के दायरे में लाने का सुझाव दिया था। इसके आधार पर रेस को टैक्स के दायरे में लाने की तैयारी है।
प्रदेश सरकार का रुख देखते हुए रेस आयोजित कराने वाली कंपनी ने वर्ष 2012 में टिकट की बिक्री का 20 प्रतिशत करीब 24 करोड़ रुपये मनोरंजन कर के रूप में जमा कर दिया था, लेकिन मनोरंजन कर विभाग 25 प्रतिशत के हिसाब से करीब 36 करोड़ रुपये मांग रहा है।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया और काफी दिनों तक चला। अब फैसला सरकार के पक्ष में आया है। इसके आधार पर वर्ष 2011 का शासनादेश रद्द करते हुए कुल टिकट की बिक्री पर 25 प्रतिशत के हिसाब से टैक्स लेने के लिए शासनादेश जारी करने की तैयारी है।
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