प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। कई जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और अस्पतालों में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) नहीं हैं। 13 जिलों में सीएमओ के बिना काम हो रहा है। वहीं 17 जिलों में सीएमएस नहीं हैं। इसी तरह छह जिला अस्पतालों में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक नहीं हैं।
प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग वेंटिलेटर पर है। स्वास्थ्य महानिदेशालय में कार्यवाहक अधिकारियों के भरोसे कार्य हो रहा है। अस्पताल दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं। पदों के मुकाबले चिकित्सकों की कमी पहले से ही है। अस्पतालों के उच्चाधिकारियों के मुख्य पद भी खाली पड़े हैं। इसके चलते नीतिगत फैसलों में दिक्कतें आ रही हैं। जिला चिकित्सालय आगरा, बरेली, झांसी, मिर्जापुर में प्रमुख अधीक्षक नहीं हैं। वहीं जिला महिला चिकित्सालय प्रयागराज और मेरठ में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक का पद खाली है। यह पद अपर निदेशक स्तर का होता है।
इसी तरह टीबी अस्पताल बस्ती, जिला चिकित्सालय गाजीपुर, जिला चिकित्सालय एटा, यूएचएम चिकित्सालय कानपुर नगर, 100 बेड संयुक्त अस्पताल छिबरामऊ कन्नौज, जिला महिला चिकित्सालय आजमगढ़, जिला महिला चिकित्सालय मऊ, जिला चिकित्सालय हमीरपुर, जिला महिला चिकित्सालय हमीरपुर, जिला चिकित्सालय बांदा, जिला चिकित्सालय महोबा, जिला चिकित्सालय महराजगंज, जिला चिकित्सालय जौनपुर, संयुक्त जिला चिकित्सालय संत कबीर नगर, जिला संयुक्त चिकित्सालय बलरामपुर और जिला महिला चिकित्सालय बलरामपुर बिना मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों के हैं।
जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं के मुख्य नोडल ऑफिसर के रूप में जिम्मेदार मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती का भी बुरा हाल है। बदायूं, कुशीनगर, बस्ती, इटावा, हापुड़, उन्नाव, रायबरेली, हमीरपुर, अयोध्या, बागपत, मुरादाबाद, सीतापुर, अलीगढ़ में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के बिना कार्य हो रहा है। प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य देवेश चतुर्वेदी का कहना है कि अधिकारियों की तैनाती अगले सप्ताह तक हो जाएगी।