अदालत ने कहा कि निर्धारित धूम्रपान क्षेत्र सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान के निषेध का केवल एक सीमित अपवाद है। वहां किसी भी सेवा की अनुमति नहीं है। उसने कहा कि नियमों में 2017 के संशोधन के बाद 'कोई अन्य सेवा' की जगह 'कोई सेवा' प्रावधान कर दिया गया है, जिससे स्पष्ट है कि हुक्का तैयार करना, उसमें तंबाकू भरना, अंगारा रखना, ग्राहक तक पहुंचाना या अंगारा बदलना सब सेवा प्रदान करने के दायरे में आएगा।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी अगर ग्राहक को तैयार हुक्का उपलब्ध कराया जाए और वह खुद उसका इस्तेमाल करे, तो इसे सेवा नहीं, बल्कि उपकरण किराए पर देना माना जाए। पीठ ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि हुक्का तैयार करने और उपलब्ध कराने में सेवा का तत्व अंतर्निहित है। केवल इस तथ्य से कि ग्राहक खुद हुक्का चला रहा है, गतिविधि का कानूनी स्वरूप नहीं बदलता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकाय अधिकारियों को हुक्का बार संचालन के लिए अलग से लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को कोटपा के तहत तलाशी, जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई का अधिकार है, ताकि वैधानिक प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित हो सके। पीठ ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान न करने वालों का स्वच्छ हवा में सांस लेने का मौलिक अधिकार निषिद्ध धूम्रपान गतिविधियों वाले कारोबार के अधिकार पर भारी पड़ता है। हाई कोर्ट ने कहा कि हुक्का बार संचालित करना और रेस्तरां में हुक्का की पेशकश करना लागू वैधानिक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।