होम्योपैथी विभाग में तबादलों को लेकर चल रहे विवाद में आखिरकार विभाग के निदेशक प्रो. एके वर्मा को निलंबित कर दिया गया है। उन्हें निलंबन अवधि में राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज गाजीपुर से संबद्ध किया गया है।
आयुष विभाग के प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने प्रो. वर्मा को निलंबित करने का आदेश बुधवार देर रात जारी कर दिया। इसमें प्रो. वर्मा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पदीय दायित्व का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया। भ्रामक तथ्यों को प्रस्तुत कर दिग्भ्रमित किया। शिथिल और संवेदनहीन कार्यशैली रही।
दरअसल, इस कार्रवाई की पटकथा तबादले के दौरान ही लिख दी गई थी। होम्योपैथी विभाग में लंबे समय से तबादला रुका हुआ है। इस वर्ष तबादला सूची तैयार करके आयुष राज्यमंत्री के पास भेजी गई। कुछ पदों पर 14 और 15 जून दोपहर तक अलग-अलग संवर्ग के तबादला आदेश जारी हो गए थे लेकिन देर रात सभी तबादले निरस्त कर दिए गए।
अंदरखाने में यह भी चर्चा है कि आयुष राज्यमंत्री, विभाग के आला अधिकारियों और होम्योपैथी निदेशक के बीच तबादले को लेकर तनातनी हई थी। कुछ डॉक्टरों ने निदेशक पर अनियमितता के आरोप भी लगाए थे। ऐसे में सूची रद्द करनी पड़ी। इस बीच आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र दयाल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की थी। इसके बाद से ही किसी न किसी पर गाज गिरनी तय मानी जा रही थी
मेरे खिलाफ गलत तरीके से की गई कार्रवाई
प्रो. एके वर्मा का कहना है कि मेरे ऊपर मनमानी तरीके से आरोप लगाए जा रहे हैं। जहां तक तबादले का मामला है तो उसके लिए गाइडलाइन जारी की गई थी। संबंधित गाइडलाइन के आधार पर ही सूची तैयार की गई। कुछ लोग अपनी गर्दन बचाने के लिए मुझे पूरे मामले में जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। मेरे खिलाफ गलत तरीके से कार्रवाई की गई है। इसके खिलाफ अदालत में गुहार लगाएंगे।