लखनऊ। युवतियों की तरह युवकों में भी खूबसूरत दिखने का जुनून बढ़ रहा है। घने बाल, सुंदर नाक और शारीरिक सुडाैलता के लिए अब युवक भी काॅस्मेटिक सर्जरी का सहारा ले रहे हैं। केजीएमयू और पीजीआई जैसे संस्थानों के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में काॅस्मेटिक सर्जरी कराने वाले युवकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। कई सर्जरी में युवकों की हिस्सेदारी 20 तो कुछ में 50 फीसदी तक है।
केजीएमयू में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डाॅ. बृजेश मिश्रा ने बताया कि काॅस्मेटिक सर्जरी का चलन बीते कुछ समय में तेजी से बढ़ा है। इसमें युवक और युवतियां दोनों शामिल हैं। सबसे ज्यादा होने वाली सर्जरी राइनोप्लास्टी है। राइनोप्लास्टी में नाक का आकार और आकृति बदली जाती है। एक महीने में इस तरह की करीब चार-पांच सर्जरी होती है। इसमें युवक और युवतियां दोनों बराबर शामिल हैं।
ब्रेस्ट रीकंस्ट्रशन के मामले में भी युवक और युवतियां, दोनों की भागीदारी है। युवतियां स्तनों की सुडाैलता और कई बार उनका आकार कम कराने के लिए आती हैं। जिम और तैराकी करने वाले काफी युवक भी वक्ष स्थल संबंधित सर्जरी के लिए आते हैं। इसे गाइनेकोमेस्टिया बोला जाता है। हर महीने इसके आठ से दस मामले आते हैं। कई बार हाॅर्मोन की गड़बड़ी की वजह से भी पुरुषों के वक्ष बेडाैल हो जाते हैं। ऐसे में भी गाइनेकोमेस्टिया का सहारा लिया जाता है। इसी तरह विभिन्न प्रकार की चोट के निशान मिटवाने के लिए भी युवक और युवतियां दोनों आते हैं।
प्रो. बृजेश मिश्रा ने बताया कि बाल झड़ने की समस्या लेकर भी युवतियों के मुकाबले युवक ज्यादा आते हैं। भीड़ ज्यादा होने की वजह से बाल प्रत्यारोपण कम हो पाते हैं। हालांकि प्लाज्मा थेरेपी के माध्यम से इनका काफी हद तक उपचार किया जाता है।
संजय गांधी पीजीआई में प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. राजीव अग्रवाल ने बताया कि संस्थान में काॅस्मेटिक सर्जरी कराने वालों में 20 फीसदी हिस्सेदारी पुरुषों की है। इनकी संख्या बीते कुछ साल में तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा शारीरिक बनावट को लेकर होने वाली सर्जरी में युवक और युवती, दोनों शामिल हैं।
केजीएमयू में काॅस्मेटिक सर्जरी का खर्च निजी सेंटर के मुकाबले काफी कम है। निजी केंद्र पर 20 से 25 हजार रुपये में होने वाली सर्जरी केजीएमयू में महज चार से पांच हजार में हो जाती है। निजी केंद्र के मुकाबले एक चाैथाई खर्च में सर्जरी होने की वजह से युवक और युवतियां दोनों केजीएमयू का रुख कर रहे हैं। हालांकि, अपनी पहचान सार्वजनिक होने के डर से काफी युवक-युवतियां केजीएमयू के बजाय निजी केंद्रों का सहारा लेते हैं।