सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ से दिल्ली, मुंबई और हावड़ा रूट की ट्रेनों को 24 बोगियों के फुल रैक के साथ चलाने की योजना थी। इसके लिए करीब 190 अतिरिक्त बोगियों (जनरल, स्लीपर और एसी) की जरूरत है, लेकिन रेलवे के पास कोच उपलब्ध न होने के कारण यह योजना कागजों तक सीमित रह गई है। नतीजतन, रेगुलर ट्रेनों में जगह न मिलने से यात्री परेशान हैं।
यात्री संगठनों का आरोप है कि स्पेशल ट्रेनें दरअसल रेलवे की कमाई का जरिया हैं। इन ट्रेनों का किराया रेगुलर ट्रेनों की तुलना में अधिक होता है। मजबूरी में यात्रियों को होली पर घर जाने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है। जहां रेगुलर ट्रेनों में क्लोन ट्रेनें चलाने और बोगियां बढ़ाने की मांग ठंडे बस्ते में है, वहीं, महंगे किराये वाली 76 स्पेशल ट्रेनें 26 फरवरी से पटरी पर उतरने को तैयार हैं।