लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में निर्माण के कुछ ही दिनों बाद गड्ढे और सड़क टूटने के आरोपों पर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। जनहित याचिका में निर्माण में कथित भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच और टोल टैक्स कम करने की मांग की गई है। कोर्ट ने संबंधित विभागों से बिंदुवार जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस वे के चालू होते ही जगह-जगह गड्ढे बन जाने और निर्माण में कथित भ्रष्टाचार के आरोप को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर केंद्र व राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने भारत सरकार के सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य सरकार के परिवहन विभाग को याचिका में लगाए गए आरोपों पर बिन्दुवार जवाब देने का आदेश दिया है।
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न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने शुक्रवार को यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव की जनहित याचिका पर पारित किया है। याचिका में कहा गया है कि 47 सौ करोड़ की लागत से बने उक्त एक्सप्रेस वे के चालू होने के 26 दिनों के भीतर इसमें 74 अलग-अलग स्थानों पर गड्ढे बन गए या सड़क टूट गई।
याचिका में इस निर्माण में भारी भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए, सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज अथवा सीबीआई जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की गई है। याची ने उक्त एक्सप्रेस वे पर टोल टैक्स की भारी कीमतों का भी मुद्दा उठाया है। मांग की गई है कि टोल टैक्स कम किये जाएं।