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यूपी: किशोर बच्चों को यौन स्वास्थ्य की शिक्षा देने के मामले में हाईकोर्ट सख्त, केंद्र-राज्य पर लगाया हर्जाना

Tue, 18 Nov 2025 08:41 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

 इस मामले में हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से सुनवाई के समय किसी के पेश न होने और मांगा गया जवाब दाखिल न करने पर संबंधित केंद्रीय विभागों पर भी 15 हजार हर्जाना लगाया है।
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लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने किशोर बच्चों को यौन स्वास्थ्य की दी जाने वाली शिक्षा के मामले में केंद्र और राज्य सरकार से मांगा गया जवाब न दाखिल कर ने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने 15 हजार हर्जाने के साथ राज्य सरकार को तीन सप्ताह में बेहतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। 

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साथ ही केंद्र सरकार की ओर से सुनवाई के समय किसी के पेश न होने और मांगा गया जवाब दाखिल न करने पर संबंधित केंद्रीय विभागों पर भी 15 हजार हर्जाना लगाया है। पहले, इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि इसके लिए आम जागरूकता पैदा करने को क्या किया। कोर्ट ने इसके लिए राज्य सरकार को पूरक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। इसके तहत राज्य के सहायक सचिव प्रेम चंद्र कुशवाहा ने हलफनामा दाखिल किया। जिससे कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ और हलफनामा दाखिल करने वाले अफसर को 15 हजार रुपए बतौर हर्जाना, कोर्ट में जमा करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने यह आदेश नैतिक पार्टी की ओर से विनोद कुमार सिंह व एक अन्य द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर दिया। याचिका में केंद्र सरकार की किशोरावस्था शिक्षा योजना - 2005 को पर्याप्त जागरूकता के साथ प्रदेश में लागू करने का आग्रह किया गया है। याचियों के अधिवक्ता चंद्र भूषण पांडेय का कहना था कि 10 से 18 साल की किशोरावस्था में बच्चो में कई शारीरिक और मानसिक परिवर्तन होते हैं। 
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ऐसे में यौन स्वास्थ्य और प्रजनन को लेकर उनका सही मार्गदर्शन करने को केंद्र ने किशोरावस्था शिक्षा योजना - 2005 को केंद्रीय और राज्यों के स्कूलों - कालेजों में प्रभावी ढंग से लागू करने की व्यवस्था की है। इसके बावजूद प्रदेश में यह योजना प्रभावी ढंग से लागू नहीं की गई। अधिवक्ता ने योजना को प्रदेश में समुचित तरीके से अमल में लाने के निर्देश राज्य सरकार को देने की गुजारिश की थी। 

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