हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अदालती आदेशों की अवज्ञा के दो अलग-अलग मामलों में सख्त रुख अपनाकर पक्षकार आई ए एस अफसरों पर पांच - पांच हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। कोर्ट ने कहा अवमानना याचिकाएं दायर करने पर याचियों को विवश व परेशान करने के लिए अफसर, सरकारी कोष के बजाए उन्हें अपने पास से हर्जाना अदा करें।
न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने पहले मामले में पक्षकार ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव सौरभ बाबू को निर्देश दिया कि दो सप्ताह में पहले दिए गए अदालती आदेश के पालन के साथ याचिकाकर्ता आशीष कुमार दुबे को 5 हजार रूपए का हर्जाना अदा करें। कहा कि अगर वह ऐसा कर दें तो उन्हें कोर्ट में पेश नहीं होना होगा।
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इसी तरह कोर्ट ने दूसरे मामले में पक्षकार ग्राम्य विकास आयुक्त गौरीशंकर प्रियदर्शी को भी निर्देश दिया कि दो सप्ताह में पहले दिए गए अदालती आदेश के पालन के साथ याचिकाकर्ताओं बृजेंद्र कुमार श्रीवास्तव व दो अन्य लोगों को 5 हजार रूपए का हर्जाना अदा करें।
कहा कि अगर वह ऐसा कर दें तो उन्हें कोर्ट में पेश नहीं होना होगा। यह मामला जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, लखनऊ के इन तीनों याचियों को पूर्ण नकदीकरण का भुगतान करने के 11 मार्च 2026 के आदेश का पालन न करने का है। कोर्ट ने कहा कि इन अफसरों पर हर्जाने का यह आदेश इसलिए दिया गया कि वे निर्धारित समय में रिट कोर्ट के आदेश का का पालन करने में नाकाम रहे।