इस बार जून से सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। सोमवार को माैसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डाॅ. एम महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं। जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल के जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मॉनसून को प्रभावित कर सकती है।
इस वर्ष ग्रहों के राजा सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 25 मई को 15:37 बजे प्रवेश करेंगे। इसके बाद सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 8 जून को 13:33 बजे तक अर्थात 15 दिन रहेंगे। ऐसे में सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश के प्रारंभ के नौ दिन तक नौतपा का प्रभाव रहेगा। ज्योतिषाचार्य पुनीत वार्ष्णेय के अनुसार, यह प्रभाव 25 मई से शुरू होकर दो जून तक रहेगा। इस दौरान पृथ्वी पर सूर्य की सीधी किरणें पड़नी शुरू हो जाती हैं जिससे इस कालखंड में भीषण गर्मी पड़ती है।
भारतीय नक्षत्रवाणी पंचांग के संपादक और ज्योतिषाचार्य पुनीत वार्ष्णेय ने बताया कि नौतपा में जितना तापमान चढ़ेगा, आने वाले समय में उतनी ही अच्छी वर्षा होने की भी संभावना बढ़ जाती है। ज्योतिष के अनुसार, यदि नौतपा में बारिश हो जाए तो आने वाले समय में बारिश में कमी रहती है। पुनीत वार्ष्णेय के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जहां सूर्य व चंद्रमा में मित्रता है वहीं रोहिणी नक्षत्र वृष राशि में आता है, जिसके स्वामी शुक्र हैं। शुक्र और सूर्य को एक-दूसरे का शत्रु माना गया है। इसलिए सूर्य इस शत्रु राशि में अपने मित्र के नक्षत्र रोहिणी में अधिक ऊर्जा के साथ प्रवेश कर और अधिक प्रभावी हो जाते हैं। 25 मई से 2 जून तक नौतपा का प्रभाव अपने चरम पर होगा और तेज धूप व गर्मी का सामना करना पड़ेगा।
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों को हीट वेब से बचाव के लिए अलर्ट कर दिया गया है। यह भी कहा गया है कि पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड के जिन जिलों में पिछले वर्ष हीट वेब की ज्यादा घटनाएं हुई हैं, वहां विशेष सावधानी बरती जाए।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों एवं चिकित्सा अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि हीट वेव वार्ड आरक्षित करके वहां एयर कंडीशनर या एयर कूलर का इंतजाम करें, हीट स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानने और तत्काल प्राथमिक उपचार देने के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की विशेष प्रशिक्षण दें, ओआरएस और आईवी फ्लूइड्स का इंतजाम, आइस पैक्स और कूलिंग किट्स जैसी सुविधाएं भी रखें।
एसीएस ने निर्देश दिया है कि हृदय गति और रक्तचाप को नियंत्रित करने वाली जीवन रक्षक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए। जहां पर दवाएं कम हों, वहां से तत्काल मांग पत्र भेजा जाए। चिकित्सक एवं चिकित्साकर्मी हीट वेब से बचाव के लिए लोगों को खानपान आदि के बारे में जागरूक करें। आशा बहुओं और एएनएम भी इस कार्य में लगें।