- - आवासीय भूखंड: 2092
- - व्यावसायिक भूखंड: 169
- - भूखंडों का आकार: 40 से 300 वर्ग मीटर
दीपावली पर लॉन्च किया जाएगा
योजना को रेरा से मंजूरी मिल गई है। अब दीपावली पर लॉन्च किया जाएगा। इससे बड़ी आबादी को आवासीय सुविधा मिलेगी। -
चंदन पटेल, उप आवास आयुक्त, आवास विकास परिषद
सीतापुर रोड पर एलडीए की प्रबंध नगर आवासीय योजना में प्लॉट खरीदने के लिए करीब 4500 रुपये प्रति वर्गफीट की दर चुकानी पड़ सकती है। पिछले 20 साल से अटकी इस योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी है। दो नवंबर को होने वाली एलडीए बोर्ड की बैठक में किसानों को बढ़ा मुआवजा देने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बोर्ड की मंजूरी के बाद मुआवजा वितरण होगा और फिर योजना लॉन्च की जाएगी। एलडीए के एक अधिकारी के मुताबिक, योजना विकसित करने में जमीन की लागत करीब 4000 से 4400 रुपये प्रति वर्गफीट तक आएगी। ऐसे में प्लॉट की दर करीब 4500 रुपये प्रति वर्गफीट रखने की तैयारी है। हालांकि, यह दर अभी प्रस्तावित है।
करीब एक महीने पहले भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण (लारा कोर्ट) ने जमीन के मुआवजे से जुड़े लंबे विवाद का निपटारा करते हुए किसानों के लिए प्रति बीघा 1.10 करोड़ रुपये से अधिक मुआवजा तय किया था। पहले यह मुआवजा 2.57 लाख रुपये प्रति बीघा था। अब एलडीए बोर्ड से मंजूरी मिलने के बाद किसानों को बढ़ा मुआवजा दिया जा सकेगा। इससे योजना के रास्ते में लंबे समय से बनी अड़चन दूर होने की उम्मीद है। एलडीए ने प्रबंध नगर योजना के लिए 13 सितंबर 2007 को जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत घैला, ककौली और अल्लूनगर डिगुरिया की करीब 3350 बीघा जमीन ली जानी थी। मुआवजे को लेकर किसानों और एलडीए के बीच विवाद होने से योजना आगे नहीं बढ़ सकी। जमीन की रजिस्ट्री पर रोक के कारण किसान अपनी जमीन बेच भी नहीं पा रहे थे। इस वजह से उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
योजना के विरोध में लारा कोर्ट में पर्यावरण संबंधी आपत्तियां भी उठाई गई थीं। इसमें हजारों पेड़ कटने और प्राकृतिक जलस्रोतों व तालाबों के खत्म होने की आशंका जताई गई थी। इसके चलते एलडीए को योजना विकसित करने के लिए जरूरी पर्यावरणीय अनापत्ति नहीं मिल सकी। बाद में एलडीए ने पूरी योजना का ड्रोन सर्वे कराया, ताकि मौजूदा निर्माण, पेड़ों और जलस्रोतों की स्थिति का आकलन किया जा सके। इसके बाद मुआवजे के विवाद के निपटारे का रास्ता निकला।
कनेक्टिविटी से भी मिलेगा फायदा
प्रबंध नगर योजना फैजुल्लागंज से लगी है। यहां जलभराव रोकने के लिए करीब साढ़े पांच किलोमीटर लंबे बंधे और पक्के पुल का निर्माण कराया जा रहा है। इससे आईआईएम तक आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। ग्रीन कॉरिडोर बनने से भी योजना की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इसके अलावा बसंतकुंज योजना तक मेट्रो का विस्तार होने से आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सकेगी।