सूबे में सरकारी विज्ञापनों के प्रचार की दुनिया जल्द ही पूरी तरह बदली-बदली दिखेगी। पढ़ाने, सुनाने या बताने के बजाय अत्याधुनिक तकनीक से बनी छोटी-छोटी फिल्म या नाटक दिखाकर सरकार के काम को जनता के दिमाग में बैठाया जाएगा।
इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को प्रचार का मुख्य हथियार बनाया जाएगा। इस सिलसिले में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए विज्ञापनों के निर्माण की नीति बना दी गई है। प्रदेश सरकार ने यह फैसला केंद्र सरकार के नक्शे कदम पर चलते हुए किया है।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि बदलते युग में लिखकर या कहकर जो बात लोगों के दिमाग में आसानी से नहीं बैठाई जा सकती वह काम चित्रों व कहानियों के जरिये आसानी से किया जा सकता है।
शायद, इसीलिए सरकार ने निजी क्षेत्र की नामी-गिरामी संस्थाओं के साथ क्षेत्रीय चैनलों की संयुक्त भागीदारी से अपनी योजना को मूर्तरूप देने का फैसला किया है। प्रमुख सचिव सूचना नवनीत सहगल की तरफ से जारी नीति में इस काम के लिए पूरी प्रक्रिया का निर्धारण कर दिया गया है।
कैसे होगा काम : फिल्म प्रोडक्शन से जुड़ी अनुभवी एजेंसियों का सूचना विभाग में पंजीकरण किया जाएगा। इसके लिए डीएवीपी की तर्ज पर काम किए जाएंगे। पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए सलाहकार समिति गठित होगी। अपर निदेशक सूचना की अध्यक्षता में गठित समिति में संयुक्त निदेशक, केंद्र सरकार के डीएवीपी, पीआईबी, दूरदर्शन, आकाशवाणी, प्रदेश के सूचना विभाग के वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी, उप निदेशक और सूचना विभाग द्वारा नामित विशेष सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव या अनुसचिव स्तर का एक अधिकारी सदस्य होगा।
तीन वर्षों के लिए किया जाएगा पंजीकरण
पंजीकरण की प्रक्रिया : पंजीकरण के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करने होंगे। समिति उन पर विचार करेगी। अगर आवश्यक हुआ तो समिति के किसी सदस्य द्वारा एजेंसी के कामकाज का भौतिक सत्यापन किया जाएगा और इसके बाद उसके चयन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पंजीकरण तीन वर्ष के लिए होगा। जरूरत पड़ने पर वार्षिक आधार पर नए सिरे से भी पंजीकरण प्रक्रिया कराई जा सकती है।
एजेंसी का कार्यालय लखनऊ में होगा : प्रोडक्शन एजेंसी का कार्यालय लखनऊ में होना चाहिए। भले ही वह किसी दूसरे राज्य की हो। जिन एजेंसियों का कार्यालय लखनऊ में होगा, उन्हें बोनस अंक दिए जाएंगे। प्रोडक्शन एजेंसी के पास कार्यालय में एसडी सिस्टम पर आधारित वीडियो एडिटिंग यूनिट (जिसमें नॉनलीनियर एडिटिंग सिस्टम जैसे एफसीपी, एविट, लिक्विट, ईडीएस एडिटिंग सिस्टम में से कोई एक जरूरी) होनी चाहिए।
इसमें कम से कम दो एचडी कैमरे, दो पूर्णकालिकअनुभवी ऑडियो/वीडियो एडिटर, दो कॉपी राइटर, दो पुरुष और दो महिला आर्टिस्ट होना आवश्यक है। एजेंसी के निदेशक को कम से कम 12 वर्ष का, प्रोडक्शन हेड को 9 वर्ष, कॉपी राइटर को 10 वर्ष, वीडियो एडीटर को 10 वर्ष और ग्राफिक्स डिजाइनर को 8 वर्ष का अनुभव होना चाहिए।