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चिंतित न हों शिक्षामित्र रास्ता निकालेगी सरकार

Sat, 19 Sep 2015 10:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द करने वाले हाईकोर्ट के आदेश की प्रति राज्य सरकार को शुक्रवार को मिल गई। सरकार अब इस पर कानूनी राय लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है।
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विभागीय जानकारों की मानें तो हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों को दूरस्थ शिक्षा से दिए गए दो वर्षीय प्रशिक्षण पर कोई खास टिप्पणी नहीं की है। सरकार इसे आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट से राहत प्राप्त करने की तैयारी में जुट गई है।

उधर, शिक्षामित्र संयुक्त मोर्चा के गाजी इमाम आला ने शुक्रवार को बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी से मुलाकात कर उनसे हाईकोर्ट के आदेश के बारे में चर्चा की। मोर्चा ने दावा किया है कि हाईकोर्ट ने उनके प्रशिक्षण को अवैध नहीं ठहराया है।
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संयुक्त मोर्चा के जितेंद्र कुमार शाही ने कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम आने के बाद परिषदीय स्कूलों में कोई भी गैरप्रशिक्षित शिक्षक नहीं रह सकता है।

राज्य सरकार ने इसके आधार पर ही राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से अनुमति लेकर उन्हें प्रशिक्षण दिया। अब एनसीईटी कह रही है कि शिक्षामित्रों के समायोजन के लिए उससे अनुमति नहीं ली गई।

चार राज्यों के मॉडल पर विचार

विभागीय जानकारों की मानें तो त्रिपुरा, राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तराखंड में शिक्षामित्रों को राहत देने के लिए अपनाई गई प्रक्रिया के बारे में जानकारी मंगाई गई है। सरकार इसके आधार पर भी शिक्षामित्रों के लिए राहत निकालने के विकल्प तलाश रही है।

शिक्षामित्रों का रुख नरम, खोला स्कूलों का ताला
हाईकोर्ट के आदेश पर समायोजन रद्द होने के बाद से आंदोलित शिक्षामित्रों ने शुक्रवार को स्कूलों का ताला खोल दिया। हालांकि उन्होंने शिक्षण कार्य का बहिष्कार जारी रखा।

शिक्षामित्र संयुक्त मोर्चा के अनिल कुमार यादव व अनिल कुमार वर्मा ने कहा कि बेसिक शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार उनकी हरसंभव मदद करेगी। इसलिए शिक्षामित्र अब स्कूलों में तालाबंदी नहीं करेंगे। स्कूल बंद होने के बाद ब्लॉक संसाधन केंद्रों पर प्रदर्शन करेंगे।

आज निकालेंगे कैंडल मार्च
शिक्षामित्र शनिवार को प्रदेश के सभी जिलों में कैंडल मार्च निकालेंगे। शिक्षामित्र संयुक्त मोर्चा के गाजी इमाम आला ने बताया कि इस दौरान हाईकोर्ट के आदेश के बाद मरने वाले शिक्षामित्रों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

आंदोलन को और धार देंगे शिक्षामित्र

वहीं जिला श्रावस्ती में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को लेकर शुरू हुआ शिक्षामित्रों का आंदोलन शुक्रवार छठे दिन भी जारी रहा। शिक्षामित्रों ने संयुक्त शिक्षामित्र संघर्ष मोर्चा के बैनर तले जूनियर हाईस्कूल भिनगा में बैठक कर आंदोलन को और धार देने की रूपरेखा तैयार की।

प्रदर्शन के दौरान जिला महामंत्री विनय सिंह ने कहा कि न्यायालय के फैसले से प्रदेश में एक लाख 72 हजार शिक्षामित्रों व उनके परिवार का भविष्य अंधकार मय हो गया है। जिसका हम शांतिपूर्ण ढंग से विरोध करते रहेंगे। यदि हमारी समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो हम विवश होकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार व एनसीटीई की होगी।

संतोष यादव ने कहा कि हमारा समायोजन देश व अन्य प्रदेश में किए गए समायोजन के अनुरूप हुआ था। केंद्र सरकार व एनसीटीई द्वारा न्यायालय में गलत तथ्य प्रस्तुत किए जाने से हमारा समायोजन निरस्त किया गया है। जिसे प्रदेश के शिक्षामित्र किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।

हम जीवन के अंतिम क्षण तक तन मन धन से आंदोलन जारी रखेंगे। धरने को वंदना सिंह, नीता शुक्ला, हितेंद्र नंदन पांडे, लवंगी देवी, अनंतराम त्रिपाठी, सुनील मिश्रा व परमेश यादव ने भी संबोधित किया। इस मौके पर काफी संख्या में शिक्षामित्र मौजूद रहे।

जबरन स्कूल बंद करा रहे शिक्षामित्र

इसके अलावा बाराबंकी में प्रशिक्षु शिक्षकों ने मंगलवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर आरोप लगाया है कि नौकरी से निकाले जाने के बाद शिक्षामित्र जबरिया विद्यालय बंद करा रहे हैं। विरोध करने पर लड़ाई-झगड़ा, यहां तक कि मारपीट पर आमादा हो रहे हैं।

प्रशिक्षु शिक्षकों ने जिलाधिकारी को दिए गए ज्ञापन में कहा है कि 12 सितंबर को शिक्षामित्रों के समायोजन को अदालत ने गलत बताते हुए उसे निरस्त कर दिया है। उसके बाद से शिक्षामित्र आंदोलन की राह पर हैं। अब वह जबरिया विद्यालय बंद करा रहे हैं। यदि विरोध किया जाता है तो ये लोग मारपीट पर आमादा हो जाते हैं।

जिससे वह लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, इससे पठन-पाठन भी बाधित हो रहा है। अब उन लोगों को विद्यालय खोलने में भी डर लगने लगा है।

इस पर जिलाधिकारी ने बीएसए को तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस मौके पर गणेश शंकर दीक्षित, राकेश यादव, रेहानुल, रघुराज सिंह, अमरेश कुमार, शैलेष कुमार, शशीकांत आदि मौजूद रहे।

यहां अब भी जारी है शिक्षामित्रों का प्रदर्शन

ज‌बकि लखनऊ में समायोजन रद्द किए जाने से आक्रोशित शिक्षामित्रों ने शुक्रवार को राजधानी में अपने-अपने ब्लॉक रिसोर्स सेंटर(बीआरसी) पर इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया। इससे पहले उन्होंने विद्यालयों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

विकास खंड माल बीआरसी पर प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश महामंत्री राघवेंद्र सिंह चौहान ने धरने का नेतृत्व किया। कहा, अगर समायोजन रद्द करने संबंधी आदेश वापस नहीं लिया गया तो वे आंदोलन जारी रखेंगे। सरोजनीनगर में बंथरा स्थित बीआरसी पर जिला मीडिया प्रभारी अतुल बाजपेई ने प्रदर्शन की कमान संभाली।

मोहनलालगंज में शिक्षामित्रों ने हाथ पर काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया। साथ ही शिक्षामित्र प्रवीण तिवारी व प्रदीप सिंह के नेतृत्व में बीआरसी से तहसील कार्यालय तक विरोध मार्च भी निकाला।

बीकेटी में शिक्षामित्र संघ के महामंत्री सुनील सिंह भदौरिया के नेतृत्व में दो दर्जन से अधिक स्कूलों और इटौंजा स्थित बीआरसी पर तालाबंदी कर प्रदर्शन किया और कई जगहों पर पदयात्रा भी निकाली।

बांह पर काली पट्टी बांध शिक्षामित्रों ने पढ़ाया

बहराइच जिले में शिक्षामित्रों और समायोजित शिक्षकों ने शुक्रवार को विद्यालय पहुंचकर बांह पर काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य किया। शिक्षक नेताओं ने विद्यालय में पहुंचकर शिक्षामित्र और समायोजित शिक्षकों को सरकार से न्याय मिलने का ढांढस बंधाया। कहा कि शासन की कार्रवाई का इंतजार करें।

जिले के प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक और शिक्षामित्र न्यायालय के आदेश के बाद शिक्षण कार्य का बहिष्कार कर रहे थे। इस बीच गुरुवार को मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री ने शिक्षामित्रों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत सभी सुविधाएं देने का आश्वासन दिया। इसके बाद शुक्रवार को शिक्षामित्र और समायोजित शिक्षक काम पर लौट आए।

सभी ने बांह पर काली पट्टी बांधकर विद्यालयों में शिक्षण कार्य किया। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के मीडिया प्रभारी दुर्गेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि संगठन के ब्लॉक अध्यक्षों ने सभी विकास खंडों में टीम बनाकर विद्यालयों का दौरा कर शिक्षामित्र और समायोजित शिक्षकों को पूर्व की तरह शिक्षण कार्य करने के लिए प्रेरित किया है। साथ ही शासन की कार्रवाई का इंतजार करने की बात कही है।

उधर दोपहर बाद संगठन के माल कचेहरी रोड पर स्थित कार्यालय पर जिलाध्यक्ष शिवश्याम मिश्र की अगुवाई में शिक्षामित्रों की बैठक हुई। जिसमें समायोजित शिक्षकों का स्थानांतरण आगामी आदेश तक शासन द्वारा रोकने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि अपने विद्यालयों में ही शिक्षक और शिक्षामित्र पठन-पाठन कार्य करते रहें।

हाईवे जाम करके किया प्रदर्शन

एक अन्य जिले रायबरेली में शुक्रवार की सुबह जगतपुर व रोहनियां क्षेत्र के शिक्षामित्रों ने का गुस्सा फूट पड़ा। सभी ने न सिर्फ लखनऊ-इलाहाबाद हाइवे जाम किया, बल्कि नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। कहा कि जल्द ही शिक्षामित्रों के पक्ष में निर्णय नहीं आया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

शिक्षामित्र एसोसिएशन के पूर्व जिलाध्यक्ष अजय प्रताप सिंह ने कहा कि शिक्षामित्रों ने पूरी उम्र शिक्षण कार्य में लगा दिया। मेहनत करके बच्चों के भविष्य का संवारने का काम किया, लेकिन अब शिक्षामित्रों से उनका हक छीना जा रहा है।

शिक्षामित्र अपने हक के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार से उम्मीद है कि वह शिक्षामित्रों के हक को दिलाने का काम करेगी। सदाशिव त्रिपाठी व अरुण सिंह ने कहा कि हक के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।

इसके लिए शिक्षामित्र चुप नहीं बैठेंगे। शिक्षामित्रों ने हाईवे पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। इस मौके पर दिलीप मिश्रा, संजय सिंह, रंजीत, राकेश, प्रतिभा सिंह, बिंदादीन, आरती आदि मौजूद रहे।
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भाजपा सांसद को ज्ञापन देकर उठाई मांग

शिक्षामित्रों ने शुक्रवार को भाजपा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह से उनके आवास पर मिलकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश संरक्षक व जिलाध्यक्ष शिवकुमार शुक्ल के नेतृत्व में शिक्षामित्रों के एक प्रतिनिधि मंडल ने सांसद कीतिबर्धन सिंह को उनके आवास पर मिलकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में शिक्षामित्रों ने मांग की है कि उन्हें पूर्व की भांति सहायक अध्यापक पद पर बहाल किया जाए। क्योंकि प्रदेश के युवा शिक्षामित्रों ने विगत 14 वर्षों से 2250 से 3500 रुपये प्रतिमाह पर प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी है।

सरकार ने 6 माह का दूरस्थ माध्यम से विशेष प्रशिक्षण देकर एनसीटीई के पत्र पर टेस्ट से छूट देते हुए सहायक अध्यापक पद पर शिक्षामित्रों का समायोजन किया था। बताया गया है कि भारत सरकार व एनसीटीई द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को लिखित अनुमति प्रदान करने के बाद भी कोर्ट में काउंटर एफिडेविड को गलत तरीके से उच्च न्यायालय में दिया गया, जिसके कारण प्रदेश के 1 लाख 72 हजार शिक्षामित्रों को 14 सालों के कार्यों को नजरअंदाज करते हुए उच्च न्यायालय द्वारा शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त कर दिया गया। इससे उनके सामने विकट समस्या खड़ी हो गई है।

सांसद ने आश्वासन देते हुए कहा कि उक्त संबंध में एक पत्र मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी को भेजेंगे तथा प्रधानमंत्री से भी मिलकर वार्ता करेंगे। ज्ञापन देने वालों में रामलाल साहू, जितेंद्र प्रकाश ओझा, शिवमूर्ति पांडेय मौजूद रहे।

उधर, मंगुरा बाजार के बेलसर बीआरसी पर एनसीटीई के विरुद्ध प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने प्रदर्शन किया। बेलसर ब्लाकॅ संसाधन केंद्र पर प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की बैठक हुई, जिसमें एनसीटीई के भेदभाव पूर्ण रवैये के खिलाफ  शिक्षामित्रों ने प्रदर्शन किया।
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