राज्य सरकार बेमौसम बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से करीब 3500 करोड़ रुपये मांगेगी। प्रभावित 65 जिलों से शासन को रिपोर्ट मिल चुकी है। इसके आधार पर मेमोरेंडम तैयार कराया जा रहा है।
शासन ने यह भी मान लिया है कि फसल बर्बादी के चलते खुदकुशी या हार्ट फेल होने से 350 किसानों की जानें जा चुकी हैं। वहीं दैवीय आपदा की आधिकारिक परिभाषा के तहत 55 मौतें हुई हैं।
केंद्र सरकार ने 33 फीसदी या उससे ज्यादा नुकसान होने पर किसानों को मुआवजा देने की घोषणा की है। सिंचित जमीन पर 13500 रुपये प्रति हेक्टेयर और वर्षा पर निर्भर जमीन पर 6750 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से केंद्र सरकार मुआवजा देगी। राजस्व विभाग के मुताबिक, 33 फीसदी या उससे ज्यादा नुकसान के दायरे में सूबे के दो करोड़ किसान आ गए हैं।
केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार इन किसानों को मुआवजा देने के लिए 3500 करोड़ रुपये की जरूरत है। संशोधित दरों पर तैयार मेमोरेंडम केंद्र को एक-दो दिन में ही भेजने की योजना है।