यूपी सरकार प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 40 जिलों के 50 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में गर्भवती महिलाओं को मुफ्त अल्ट्रासाउंड की सुविधा मुहैया कराएगी।
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इसके लिए प्राइवेट अल्ट्रासाउंड केंद्रों को पीपीपी मोड पर जोड़ा जाएगा। अभी ग्रामीण इलाकों की सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था न होने के कारण गर्भवती महिलाओं को जिला स्तर के अस्पतालों को रेफर करना पड़ता है।
परिवार कल्याण मंत्री प्रो. रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि इस नई व्यवस्था से अब गर्भवती महिलाएं अल्ट्रासाउंड से वंचित नहीं रहेंगी। अभी बहुत सी गर्भवती महिलाएं सुरक्षित प्रसव न होने के कारण जान-माल का खतरा रहता है।
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प्रदेश के 50 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को चुना गया है जहां अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। ये ऐसे सीएचसी हैं, जहां प्रसव अधिक संख्या में होते हैं। इसलिए इन सीएचसी पर पीपीपी मोड पर अल्ट्रासाउंड सुविधा मुहैया कराई जा रही है।
उन्हीं अल्ट्रासाउंड केंद्रों को इस योजना के तहत चुना जाएगा, जो लिंग चयन प्रतिषेध अधिनियम (पीसीपीएनडीटी एक्ट) के तहत पंजीकृत हैं। अल्ट्रासाउंड केंद्र सीएचसी से एक से दो किलोमीटर के दायरे में होने चाहिए।
एनएबीएल एक्रेडेटेड अल्ट्रासाउंड सेंटर के लिए 300 रुपये प्रति केस व नॉन एनएबीएल एक्रेडेटेड अल्ट्रासाउंड सेंटर के लिए 255 रुपये प्रति केस की दर निर्धारित की गई है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 470 निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने सरकारी अस्पतालों में स्वैच्छिक सेवाएं देने के लिए पंजीकरण किया है। इनमें से 258 ने सेवाएं देनी शुरू भी कर दी हैं।
इन जिलों की सीएचसी का हुआ चयन
सीतापुर, श्रावस्ती, सुल्तानपुर, रायबरेली, गोंडा, बलरामपुर, बाराबंकी, बहराइच, फैजाबाद, आगरा, अलीगढ़, बागपत, बलिया, बरेली, बिजनौर, बदायूं, देवरिया, एटा, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हमीरपुर, हरदोई, हाथरस, जौनपुर, झांसी, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कौशांबी, खीरी, कुशीनगर, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, पीलीभीत, प्रतापगढ़, रामपुर, संभल व शाहजहांपुर।