यूपी मूल के प्रवासी भारतीयों से रिश्ते बढ़ाने के लिए सरकार बहुप्रतीक्षित नीति जल्द लाने की तैयारी कर रही है। अक्तूबर में प्रस्तावित औद्योगिक इकाइयों के सामूहिक शिलान्यास समारोह (ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी) से पहले इसे मंजूरी दी जा सकती है। नीति को फाइनल करने से पहले केंद्र सरकार का भी मार्गदर्शन लिया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि यूपी मूल के प्रवासी भारतीयों को प्रदेश में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने तथा प्रदेश के इच्छुक कामगारों को रोजगार के लिए विदेश भेजे जाने से संबंधित बिंदुओं पर एक नीति बनाने पर लंबे समय से मंथन चल रहा है। 14 अगस्त को प्रमुख सचिव प्रवासी भारतीय विभाग की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रस्तावित नीति को जल्द से जल्द फाइनल करने पर सहमति बनी है। रोजगार के लिए विदेश जाने के इच्छुक कामगारों का प्रवास सुगम और सुरक्षित हो, इसके लिए भी इस नीति में व्यवस्था की जाएगी। प्रदेश के अन्य हिस्सों के अलावा पूर्वांचल से बड़ी संख्या में कामगार खाड़ी व अन्य देशों में रोजगार के लिए जाते हैं। विभाग के कार्यों के अच्छे तरह से संचालन के लिए एक स्वतंत्र निदेशालय के गठन का भी प्रस्ताव है। इसमें प्रवासी भारतीयों से समन्वय, उनकी सहायता व प्रोत्साहन से जुड़े काम होंगे।
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नीति में इन बिंदुओं को शामिल करने का प्रस्ताव
- पंचायतीराज विभाग आम नागरिकों व प्रवासी भारतीयों को विकास योजनाओं से जोड़ने के लिए मातृभूमि योजना लेकर लाया है। इसमें कोई भी व्यक्ति गांवों के बुनियादी ढांचे के विकास में हिस्सेदार बन सकता है। इसमें कुल परियोजना लागत का 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती है। बाकी 60 प्रतिशत इच्छुक लोग देते हैं। बदले में परियोजना का नाम सहयोगियों के रिश्तेदारों के नाम पर रखा जा सकता है। प्रस्तावित नीति में मातृभूमि योजना को भी जोड़ने की तैयारी है।
- केरल और उड़ीसा सरकार ने अपने राज्यों के प्रवासी भारतीयों के हित से जुड़ी कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की हैं। प्रस्तावित नीति में इन राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस का अध्ययन कर अमल में लाने का प्रयास होगा।
आठ प्रवासियों को दिया जाएगा प्रवासी भारतीय रत्न पुरस्कार
प्रदेश सरकार हर वर्ष आठ प्रवासियों को प्रवासी भारतीय रत्न पुरस्कार देती है। वर्ष-2023 के लिए 12 लोगों के नाम शार्टलिस्ट किए गए हैं। इनमें आठ नामों को फाइनल करने के लिए एनआरआई मंत्री की अध्यक्षता में जल्द बैठक की तैयारी है।