उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्रों के निर्धारण की नीति जारी कर दी है। पूर्व मध्यमा द्वितीय (हाईस्कूल) व उत्तर मध्यमा द्वितीय (इंटरमीडिएट) की परीक्षाओं में नकल को रोकने के लिए काफी सख्ती की जाएगी। सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में बोर्ड परीक्षा होगी। सिर्फ सरकारी व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालयों को ही परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। वित्तविहीन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से जारी नीति में कहा गया है कि हर केंद्र पर न्यूनतम 100 और अधिकतम 500 छात्र रहेंगे। किसी जिले में संस्कृत छात्रों की संख्या 100 से कम है तो वहां सिर्फ एक ही परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। ऐसे विद्यालय जिनके खिलाफ पूर्व में नकल कराए जाने की शिकायतें मिली हैं उन्हें केंद्र नहीं बनाया जाएगा। जिन विद्यालयों में यूपी बोर्ड के परीक्षा केंद्र होंगे, उन्हें परिषद की परीक्षा का केंद्र नहीं प्रस्तावित किया जाएगा।
उन्होंने कहा है कि दिव्यांग छात्रों व बालिकाओं को स्वकेंद्र परीक्षा की सुविधा दी जाएगी। निर्धारित परीक्षा केंद्र से इतर किसी दूसरे परीक्षा केंद्र पर कोई छात्र परीक्षा देते मिला तो उसकी पूरी परीक्षा निरस्त कर दी जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे व वायस रिकार्डर हर हाल में लगे होने चाहिए। परीक्षा के बाद कम से कम 30 दिन तक उसकी रिकार्डिंग को सुरक्षित रखना होगा। जिला समिति चार नवंबर तक केंद्रों का निर्धारण करेगी। 15 नवंबर तक संस्कृत शिक्षा परिषद के सचिव को केंद्रों की सूची 15 नवंबर तक भेजनी होगी।
एक ही विद्यालय के छात्रों को दो केंद्र नहीं
निदेशक ने कहा है कि एक से अधिक विद्यालयों का संचालन कर रहे प्रबंधकों के स्कूलों के छात्रों का परीक्षा केंद्र एक-दूसरे विद्यालय में नहीं बनेगा। उन्हें किसी दूसरे प्रबंधतंत्र से संचालित विद्यालय में परीक्षा देने जाना होगा। एक ही विद्यालय के छात्रों को दो परीक्षा केंद्रों में परीक्षा देने के लिए नहीं भेजा जाएगा। उनका एक ही परीक्षा केंद्र बनेगा। कॉपियों को लोहे की अलमारी में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में रखा जाएगा।