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'उप्र केंद्र सरकार से भी ज्यादा स्मार्ट सोच रखता है'

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लखनऊ में हुए एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि केंद्र सरकार तो कुछ ही शहरों को स्मार्ट बनाना चाहती है जबकि हम आशाओं तक को स्मार्ट बना रहे हैं।
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आशाओं को स्मार्ट फोन दे रहे हैं। इससे न सिर्फ इनका काम आसान होगा बल्कि उन्हें मोटे-मोटे रजिस्टर भी नहीं भरने पड़ेंगे। तकनीक के इस्तेमाल से भ्रष्टाचार को भी कम करने में मदद मिलती है।

मुख्यमंत्री मंगलवार को अपने सरकारी आवास पांच कालिदास मार्ग पर स्वास्थ्य विभाग की परियोजना एम-सेहत को लांच कर रहे थे। पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुई यह परियोजना पांच शहरों बरेली, कन्नौज, मिर्जापुर, सीतापुर व फैजाबाद में शुरू की गई है।
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इसके तहत आशा, एएनएम व प्रभारी चिकित्साधिकारियों को स्मार्ट फोन व टैबलेट दिए जा रहे हैं। ऐसा होने से हर आशाबहू पूरी तरह से स्मार्ट हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कुछ दिन पहले जब एक प्रदेश में चुनाव होने जा रहा था तो देश के सबसे बड़े नेता ने इस बात को कहा कि यहां सीएचसी व पीएचसी कितने खुले हैं।

यदि यह गिनती उत्तर प्रदेश में चुनाव के समय होगी तो मैं यह समझता हूं कि वे गिनती में पीछे छूट जाएंगे, क्योंकि हम हर चीज में बहुत आगे हैं। यदि गिनती मोबाइल, टैबलेट व लैपटाप की होगी तो एक तरफ देश और दूसरी तरफ केवल उत्तर प्रदेश ही होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट फोन से आशाओं व एएनएम का काम और आसान हो जाएगा। जिन्हें स्मार्ट फोन व टैबलेट चलाना नहीं आता है उन्हें हम सिखा देंगे। कई लोग तो चला चलाकर सीख जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग आम जनता से जुड़ा हुआ विभाग है। प्रदेश की सपा सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में काफी काम किया है।

इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ी पायलट प्रोजेक्ट है। इससे स्वास्थ्य विभाग में काफी बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार के समय बेईमान डॉक्टरों व कर्मचारियों को सपा सरकार ने जेल भेज दिया है।
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समय पर मिल सकेगा आशाओं को मानदेय

प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरविन्द कुमार ने बताया कि एम-सेहत प्रोजेक्ट पांच जिलों में शुरू किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट 27.55 करोड़ रुपये का है। इसके तहत 10252 आशाओं को स्मार्ट फोन दिया जाएगा।

1719 एएनएम को टैबलेट व 300 से अधिक प्रभारी चिकित्साधिकारियों व राज्य स्तरीय नोडल अधिकारियों को भी इसके तहत टैबलेट मिलेंगे।

उन्होंने बताया कि एम-सेहत योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी कैल्टन टेक सॉल्यूशन लिमिटेड हैदराबाद को टर्न की आधार पर दिया गया है।

इस साझेदारी में सीएमएस कम्प्यूटर, इन्ट्रा हेल्थ इंटरनेशनल, वीडियोकॉन एवं एयरटेल शामिल हैं। कैल्टन कंपनी तीन साल तक अपना पूरा सहयोग प्रदान करेगी। प्रमुख सचिव ने बताया कि इस योजना के जरिए मातृ मृत्यु दर व शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है।

एम-सेहत प्रोजेक्ट में ऐसी मोबाइल एप्लीकेशन बनाई गई है कि इसके जरिए मोबाइल फोन से ही आशाओं को दिए जाने वाले मानदेय की निगरानी हो सकेगी। जैसे ही आशा मोबाइल के जरिए डाटा फीड करेंगी। उनका मानदेय जेनरेट हो जाएगा। इससे मानदेय वितरण पारदर्शी तरीके से हो सकेगा। समय पर भुगतान हो इसके लिए जिम्मेदारी भी इसके जरिए सुनिश्चित की जाएगी।

इसके तहत विभिन्न प्रकार की मोबाइल एप्लीकेशन स्मार्ट फोन व टैब में मौजूद रहेंगी। इसके जरिए लाभर्थियों का पंजीकरण, ट्रैकिंग, काउंसलिंग, रिपोर्टिंग, स्क्रीनिंग व रेफरल आदि का कार्य आशा न एएनएम करेंगी। प्रभारी चिकित्साधिकारी टैबलेट पर अपने क्षेत्र की रिपोर्ट डैश-बोर्ड के माध्यम से देख सकेंगे। चयनित जनपदों का डाटा व रिपोर्ट राज्य स्तर पर भी देखी जा सकेगी।

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