मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के विदेश से लौटने के बाद सरकार सूखा प्रभावित जिलों के किसानों की मुश्किलों को लेकर फिर सक्रिय हुई है।
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने अधिकारियों को सूखा प्रभावित जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कराने की कार्यवाही जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है।
कैबिनेट की अगली बैठक में करीब 44 जिले सूखाग्रस्त घोषित किए जा सकते हैं। मुख्य सचिव ने सूखा प्रभावित जिलों में 31 मार्च 2015 तक राजस्व वसूली स्थगित रखने को कहा है।
मुख्य सचिव सोमवार को एनेक्सी स्थित अपने कार्यालय में राज्य स्तरीय दैवीय आपदा राहत समिति के बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
उन्होंने 50 प्रतिशत से कम बारिश वाले जिलों को चिह्नित कर सूखाग्रस्त घोषित कराने की कार्यवाही प्राथमिकता से करने का निर्देश दिया।
पिछले हफ्ते तक ऐसे जिलों की संख्या 41 थी जो अब 44 हो गई है। मुख्य सचिव ने सूखाग्रस्त जिलों के किसानों को जरूरी सुविधाएं देने के लिए विभागों में संचालित योजना के तहत जरूरी रकम केंद्र सरकार से मांगने का निर्देश दिया।
रंजन ने मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को सूखे की कार्ययोजना के अनुसार जिला स्तर से जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
लो वोल्टेज से प्रभावित ट्यूबवेलों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सिंचाई व बिजली विभाग के अधिकारी मिलकर काम करें। उन्होंने चेताया कि बाढ़ प्रभावित जिलों में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम में कोताही न बरती जाए।
बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त वीएन गर्ग, प्रमुख सचिव राजस्व केएस अटोरिया, प्रमुख सचिव पंचायतीराज चंचल कुमार तिवारी, प्रमुख सचिव पशुपालन अनंत कुमार सिंह आदि उपस्थित थे।