दूसरे प्रदेशों में बढ़ते कोरोना के आंकड़ों के चलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक ओर आला अधिकारियों को सर्तकता बरतने के आदेश दिए हैं तो वहीं प्रदेश के सभी अस्पतालों को अलर्ट पर रखने के निर्देश भी दिए हैं।
कोरोना से निपटने के लिए योगी आदित्यनाथ ने एक मजबूत रणनीति के तहत प्रदेश में काम किया। जिसके परिणामस्वरूप आज उत्तर प्रदेश में कोरोना से निपटने के लिए आज प्रदेश में उचित संसाधन और समूचित व्यवस्था है। संसाधनों के मामले में अब उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भर बन चुका है।
प्रदेश में खुली वीटीएम ट्यूब निर्माण इकाई
सरकार ने प्रदेश में जरूरत बढ़ने समय समय पर संसाधनों को जुटाने के संग उनको अपने प्रदेश में उत्पादित करने का फैसला लिया। प्रदेश में वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम (वीटीएम) ट्यूब निर्माण के लिए लाइसेंस दिया गया। कोरोना काल से पहले प्रदेश में वायरल ट्रांसपोर्ट मीडियम (वीटीएम) ट्यूब निर्माण की एक भी ईकाई नहीं थी जरूरत बढ़ने पर सरकार ने नोएडा, गाजियाबाद व लखनऊ में निर्माण ईकाई को वीटीएम ट्यूब बनाने के लिए लाइसेंस दिया। वीटीएम ट्यूब का प्रयोग कोविड की जांच के लिए किया जाता है। प्रदेश में अब चार इकाइयों को अनुमति दी गई है।
कोरोना काल के दौरान जांच, बेड और वेंटिलेटर की व्यवस्था के साथ अन्य संसाधनों को प्रदेश सरकार ने बढ़ाया। साल 2020 फरवरी तक प्रदेश में हैंड सैनिटाइजर बनाने की सिर्फ 86 इकाइयां थी, जो बढ़कर अब 151 हो गईं हैं। फरवरी से अब तक सैनिटाइजर की 65 नई इकाइयों को स्थापित किया जा चुका है।
दवा की बिक्री करने वालों पर कसा शिकंजा
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कोरोना काल के दौरान मनमानी करने वालों पर शिकंजा कसा। ड्रग्स एक्ट के तहत दवाओं की बिक्री में मनमानी पर नौ मुकदमे दर्ज कर 23 लोगों को गिफ्तार कर 85 लाख 18 हजार 855 रुपए की सामग्री को सीज की गई। इसके अलावा आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्रदेश में मास्क हैंड सैनिटाइजर और ऑक्सीजन से संबधित अवैध कारोबार पर 15 मुकदमें दर्ज किए गए।
ड्रग कंट्रोलर एके जैन का कहना है कि प्रदेश में वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने के लिए व्यवस्था को सुदृढ़ बनाते हुए दवा से लकर ऑक्सीजन की व्यवस्था को सुनिश्चित किया गया। निर्माण इकाइयों के शुरू होने से प्रदेश में अब संसाधनों की कमी नहीं पड़ेगी।