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कोरोना वायरस के कारण बंदी से लोगों पर नहीं होगा असर, अकाउंट में पैसे देगी योगी सरकार

Tue, 17 Mar 2020 08:39 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए कई निर्णय लिए गए हैं। सरकारी कार्यालयों में भीड़ खत्म करने के लिए कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है।

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बैठक में मुख्यमंत्री ने कोरोना पर केंद्र सरकार की एडवायजरी का 100 फीसदी पालन करने को कहा है साथ ही प्रदेशवासियों से भीड़भाड़ में जाने से बचने की अपील की है। प्रदेश के सभी पर्यटक स्थल 31 मार्च तक बंद रहेंगे।

कैबिनेट के एजेंडे से इतर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों के साथ कोरोना महामारी की गंभीर स्थिति से बचाव को लेकर विस्तार से चर्चा की और महत्वपूर्ण फैसले किए। राज्य सरकार के प्रवक्ता व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि सरकार के फैसलों का असर रोजमर्रा रोजी-रोटी के लिए काम करने वाले दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ सकता है।
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ऐसे में मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण निर्णय करते हुए उन्हें आरटीजीएस के जरिए नकद भुगतान का फैसला किया है। इसके लिए वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की अध्यक्षता में एक समिति गठित कर दी गई है। इसमें कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य शामिल हैं। यह समिति तीन दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। इन्हें भरण-पोषण के लिए आरटीजीएस के जरिए एकाउंट में तय धनराशि भेजी जाएगी।

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कैबिनेट बैठक में पांच प्रस्तावों को दी गई मंजूरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में पांच प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें फतेहपुर में केंद्रीय विद्यालय व गोरखपुर में विधि विज्ञान प्रयोगशाला के निर्माण संबंधी अड़चन दूर करने के साथ ही खनिज परिहार नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव शामिल हैं। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया केंद्र सरकार की ओर से फतेहपुर में केंद्रीय विद्यालय का निर्माण होना है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने ग्राम मधुपुरी, परगना व तहसील फतेहपुर में निशुल्क 5.37 एकड़ जमीन देने का फैसला किया है।

विधि विज्ञान प्रयोगशाला होगी उच्चीकृत
प्रवक्ता ने बताया कि गोरखपुर में क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला का निर्माण किया जा रहा है। पूर्व में इसे श्रेणी बी के रूप में स्वीकृत किया गया था। तब इसकी लागत 28 करोड़ 68 लाख 64 हजार रुपये थी। ए श्रेणी के काम को पूरा करने के लिए इसका पुनरीक्षित एस्टीमेट 33.21 करोड़ रुपये का स्वीकृत हुआ है। इसमें से 29 लाख रुपये कार्यदायी संस्था को अवमुक्त किए जा चुके हैं।

अब सरकार ने जिले की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या व अपराध की संख्या व प्रकृति को देखते हुए निर्माणाधीन प्रयोगशाला को ए श्रेणी में उच्चीकृत करने का फैसला किया है। दूसरी बार पुनरीक्षित एस्टीमेट में 66 करोड़ 10 लाख 65 हजार रुपये मंजूर किए गए हैं। राजकीय निर्माण निगम करीब 67 फीसदी प्रोजेक्ट पूरा कर चुका है।

‘फिल्म ‘तानाजी द अन्संग वॉरियर’ पर एसजीएसटी फ्री

प्रदेश सरकार ने फिल्म ‘तानाजी द अन्संग वॉरियर’ को टैक्स फ्री करने के सरकार के पूर्व के निर्णय को कार्येत्तर मंजूरी दे दी है। 15 जनवरी 2020 को एक शासनादेश के जरिए फिल्म को टैक्स फ्री करने का फैसला किया था। अब इस पर कैबिनेट की सहमति ली गई है।

जिला खनिज फाउंडेशन न्यास नियमावली में संशोधन को मंजूरी
प्रदेश सरकार ने यूपी जिला खनिज फाउंडेशन न्यास (प्रथम संशोधन) नियमावली-2020 को मंजूरी दे दी है। बालू, मौरंग व गिट्टी आदि उपखनिजों के संबंध में खनन लाइसेंस धारक की ओर से रायल्टी की धनराशि का 10 फीसदी न्यास निधि में भुगतान किया जाता है। यह रायल्टी की धनराशि के अतिरिक्त होती है।

नियमावली में उच्च प्राथमिकता के क्षेत्रों व मदों पर न्यास निधि की कम से कम 60 फीसदी व अन्य प्राथमिकता के क्षेत्रों व मदों पर बाकी 40 फीसदी धनराशि खर्च करने का प्रावधान है। उच्च प्राथमिकता के कार्यों में पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण उपाय तो शामिल हैं, पर इसके अंतर्गत पर्यावरणीय सौहार्द एवं संपोषणीय खान विकास के लिए प्रदूषण नियंत्रण के तौर तरीके व अन्य प्राथमिकता के क्षेत्रों में पर्यावरणीय गुणवत्ता में वृद्धि के अन्य उपाय शामिल नहीं थे। कैबिनेट ने इन कार्यों को भी शामिल करने की मंजूरी दे दी है।
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विकास परियोजनाओं के खनन सामग्री के निस्तारण की प्रक्रिया तय

यूपी उप खनिज (परिहार) 49 वां संशोधन नियमावली-2020 को मंजूरी दी गई है। इसके अंतर्गत प्रदेश में भवनों (गैर वाणिज्यिक, निजी आवासीय भवनों को छोड़कर) तथा विकास परियोजनाओं के निर्माण के दौरान खुदाई से निकलने वाले उपखनिजों के निस्तारण की प्रक्रिया निर्धारण को भी जोड़ा गया है। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट द्वारा रायल्टी तय की जाएगी। आवेदन प्राप्त होने के एक महीने में निस्तारण नहीं किया गया तो भुगतान की गई रायल्टी के आधार पर लाइसेंस पत्र जारी समझा जाएगा।
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